न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
कासगंज की हिंसा में आंख गंवा चुके कांस्टेबल अकरम हिंदू मुस्लिम एकता के प्रतीक बन गए हैं। अकरम ने कासगंज में अपने ऊपर हमला करने वालों को माफ कर दिया है। इस हमले में अकरम अपनी एक आंख गंवा चुके हैं।
जेएन मेडिकल कॉलेज में उपचार करा रहे अकरम ने कहा कि वह घटना वाले दिन अलीगढ़ आ रहे थे। कासगंज से जो रास्ता अलीगढ़ की ओर कटा है वहां पर लगे बैरियर को कुछ लोग हटा रहे थे।
उन्होंने समझा कि फोर्स है, लेकिन जब नजदीक पहुंचे तो पता लगा कि माब है। अकरम ने बताया कि उनके हुलिया को देखते हुए ही माब हमलावर हो गया।
उन्होंने अपनी कार पीछे की तो वह पीछे एक गाड़ी से टकरा गई। इसके बाद पत्थर और लाठी से हमला होने लगा। उन्होंने भीड़ में शामिल लोगों से कहा कि उनकी पत्नी अस्पताल में भर्ती है। उन्हें जाने दो।
माब में कुछ लोग लगातार चिल्ला रहे थे कि हमारे दो आदमी गए हैं हम बदला लेंगे। कुछ लोगों ने तमंचे भी निकाल लिए, लेकिन इसके बाद पता नहीं क्या समझ आया कि मुझे जाने दिया। मैं अल्लाह से दुआ करता हूं कि वह लोग ठीक रहें।
मुझे उनसे कोई शिकायत नहीं है। मैं उनको तहे दिल से माफ करता हूं। अब मुझे उनसे कोई शिकवा शिकायत नहीं है। ऊपर वाला उन्हें आबाद रखे।