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अदालत में बढ़ गई एनसीआर की पेशियां

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क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़।
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अलीगढ़ की अदालत में गैर राज्यों के अपराधियों की पेशियों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है। इस संबंध में जब अधिवक्ता सरदार मुकेश सैनी एडवोकेट ने अपने स्तर से जानकारी जुटाई तो स्पष्ट हुआ कि पिछले दो तीन वर्षों में अपराधियों के अपराध करने के तरीके में आए बदलाव और स्थानीय स्तर के अपराधियों से दूसरे राज्यों के अपराधियों के गठजोड़ के चलते यह हुआ है। यह भी चलन हुआ है कि कुछ मामलों में स्थानीय अपराधी बाहर के अपराधियों से अपराध करा रहे हैं।

सरदार मुकेश सैनी एडवोकेट ने बताया कि उनके पास कुछ ऐसे ही मुकदमे हैं जिनमें स्थानीय अपराधियों के साथ गतिविधि को अंजाम देने में एनसीआर के अपराधी भी साथ थे। जब यह लोकल अपराधी पुलिस ने पकड़े तो जांच में और पूछताछ में एनसीआर के अपराधियों के नाम भी सामने आए।
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इसी के चलते बी वारंट के साथ उन्हें भी यहां पर पेश किया गया। आज स्थिति यह है कि प्रतिदिन 15 से 20 और कभी कभी तो 25 अपराधी एनसीआर के स्थानीय अदालतों में पेश होने आते हैं। जबकि दो ढाई दशक पहले यह संख्या महीने में एक या दो थी। यही वजह है कि परिसर में दिल्ली पुलिस, हरियाणा पुलिस, पंजाब पुलिस के जवान दिखाई देते हैं।

‘दो दशक पहले और वर्तमान समय में अपराध करने के तरीके में बदलाव आया है। डिजटल के दौर में संपर्क रखना आसान है। अपराधी एक दूसरे के बेहतर संपर्क में हैं। एक वजह यह भी है कि एनसीआर और खास तौर पर दिल्ली में अपराध करना उतना आसान नहीं है जितना उसके आसपास के इलाकों में।
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उदाहरण के तौर पर वहां की एक बड़ी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था मेट्रो पूरी तरह सीसीटीवी से कवर है। प्रवेश में कड़ी सुरक्षा है। चप्पे चप्पे पर सीआरपीएफ के जवान हैं। वहां अपराध दर करीब करीब शून्य है। लेकिन आसपास के इलाकों में परिवहन प्रणाली ऐसी नहीं है’
- राम कृष्ण तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता
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