क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
एएमयू से निष्कासित शोध छात्र मन्नान बशीर वानी के आतंकी संगठन में शामिल होने की खबर के बाद रडार पर संदिग्धों की रेकी जारी है। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो और टेक्स्ट पर कड़ी नजर रखी जा रही है। वहीं, एटीएस अधिकारियों ने कैंपस में डेरा डाल रखा है। वह हर संदिग्ध लोगों की गतिविधियों पर नजर गड़ाए हुए हैं।
आतंकी गतिविधि में शामिल होने के आरोपी निष्कासित शोध छात्र मन्नान वानी के बाद कैंपस में संदिग्ध लोगों पर नजर ही नहीं रखी जा रही है, बल्कि उनकी हर गतिविधियों को गंभीरता से देखा जा रहा है। वह कहां जा रहे हैं और किससे मिल रहे हैं।
इन सब पर एटीएस की पैनी निगाह है। निगरानी के जाल में संदिग्धों को फांस दिया गया है। संदिग्धों की गतिविधियों का आकलन और पुष्टि के बाद ही उनसे पूछताछ की जाएगी।
उधर, सुरक्षा एजेंसियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से संपर्क कर पिछले 10 वर्षों में यहां पर अध्ययन करने वाले कश्मीरी छात्रों का विवरण मांगा है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इससे छात्रों को परेशान होने की जरूरत नहीं है।
वह लोग सिर्फ यह जांच करके आश्वस्त होना चाहते हैं कि कहीं कोई और ‘मन्नान’ तो नहीं है। इसलिए यह सिर्फ एहतियात के बतौर उठाया गया कदम है, जिससे युवा किसी गलत राह पर नहीं चले जाएं।
एएमयू इंतजामिया ने विभागाध्यक्षों से कश्मीरी छात्रों का मांगा ब्यौरा
पिछले दिनों सुरक्षा एजेंसियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से संपर्क कर पिछले 10 वर्षों में यहां पर अध्ययन करने वाले कश्मीरी छात्रों का विवरण मांगा था। अब एएमयू इंतजामिया ने सभी विभागाध्यक्षों से कश्मीरी छात्रों का ब्यौरा मांगा है। पांच साल में कितने कश्मीरी छात्र पढ़ चुके हैं और कितने कश्मीरी छात्र बीच में पढ़ाई छोड़कर चले गए हैं। इस समय में यूनिवर्सिटी में कश्मीरी छात्रों की तादाद करीब 850 है। एमआईसी जनसंपर्क विभाग प्रोफेसर शाफे किदवई का कहना है कि कश्मीरी छात्रों के पिछले पांच साल का लेखा-जोखा देने के लिए सभी विभागाध्यक्षों को पत्र भेज दिया गया है।