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अखिलेश के दूत के पहुंचने के पहले ही आपसी महासंग्राम-Cordination

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
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हरदुआगंज एनकाउंटर मामले की जांच करने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा गठित कमेटी के अलीगढ़ आने के पहले ही अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र नेताओं एवं छात्रों में महासंग्राम शुरू हो गया है। एएमयू छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष एवं सपा युवजन सभा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष मसूद उल हसन की टिप्पणी के बाद छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन भड़क गए है। उन्होंने पूर्व उपाध्यक्ष को आड़े हाथ लिया है।

हरदुआगंज एनकाउंटर के बाद से ही एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन सक्रिय है। एएमयू छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष मसूद उल हसन ने अखिलेश यादव द्वारा हरदुआगंज मामले की जांच के लिए वरिष्ठ नेताओं की कमेटी गठित करने एवं बुधवार को उनके अलीगढ़ में पहुंचने की खबर का हवाला देकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि इससे हरदुआगंज मामले में जज्बाती राजनीति कर रहे नेताओं के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई है। उन्होंने पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन की ओर इशारा करते हुए कहा है कि जिस तरह एक बार हमारे छोटे भाईयों एवं बहनों को पुलिस से पिटवाया गया था और 400 के खिलाफ मुकदमा कायम हुआ था। अगर वह मुकदमा कायम रहता तो सैकड़ों एएमयू छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ जाता और आप दुम दबाकर निकल लेते। उल्लेखनीय है कि सैयद मसूद उल हसन ने पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर माहौल को गरम कर दिया था।
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पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से सैयद मसूद उल हसन को करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा है कि जिस रेल रोको आंदोलन आंदोलन को आप बेवकूफी बता रहे हैं, यकीन मानिये वह आंदोलन छात्र राजनीति का सबसे बड़ा आंदोलन था। और उस वक्त आपके अखिलेश यादव की सरकार थी। स्मृति ईरानी के खिलाफ आपकी आपत्तिजनक टिप्पणी का परिणाम आज तक यूनिवर्सिटी भुगत रही है। 300 करोड़ के बदले अब 100 करोड़ मिल रहे हैं और एएमयू सेंटर बंद होने के कगार पर पहुंच गये हैं। वहां के बच्चों के खाने और टीचर को सैलरी देने के लिए पैसे नहीं हैं। आप स्वयं अपने नेता अखिलेश यादव से पूछ लीजिएगा कि फैजुल हसन को कितनी बार बुलवाया है। लेकिन मैं इसलिए नहीं जाता हूं कि आपके अध्यक्ष अखिलेश यादव के पास 7 बार लेटर एवं 2 बार अपना डेलिगेशन भेजने के बावजूद गंगानगर कॉलोनी एवं एएमयू के बिजली बिल को आधा या पूरा माफ करने का काम नहीं हुआ। फैजुल हसन ने लिखा है कि विधान सभा चुनाव के समय मायावती से 45 मिनट फोन पर बात की। उनसे मांग की कि सरकार आते ही 48 घंटे के अंदर एएमयू से संबंधित मांगे पूरी कर देंगी। उसके बाद डंके की चोट पर मायावती को समर्थन दिया था।
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