क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़।
थानाक्षेत्र में रामघाट रोड पर बसे गांव सफेदपुरा के पास कलाई माइनर के सहारे मंदिर के पुजारी की हत्या और दंपती की हत्या के दौरान जो कुछ हुआ वह बेहद नृशंस था। मौका-ए-वारदात के हालात, पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्य और पोस्टमार्टम रिपोर्ट जो गवाही दे रही है, उससे तो कुछ ऐसा ही लगता है।
पहले शुक्रवार/शनिवार की मध्य रात्रि में साधु का सोते समय कमरे से बाहर बेरहमी से कत्ल किया गया। पीटते-पीटते उसकी एक आंख तक फोड़ दी गई। शव को जमीन पर पटकने के बाद हत्यारे भाग गए।
कमरे से कुछ सामान भी ले गए, क्योंकि दंपती की लाशें जिस दिशा में मिलीं, उस दिशा में जाने वाले रास्ते पर मंदिर से लूटा गया नारियल भी पड़ा मिला है।
फिर चकरोड से करीब 200 मीटर अंदर जिस खेत में दंपती के शव मिले, वह भी दूर-दूर पड़े थे। दोनों शवों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता था कि उन्हें यहां काफी देर तक इधर से उधर घसीटा गया था।
चप्पलें कहीं पड़ी थीं, कहीं दांत टूटे पड़े थे और घसीटे जाने के कारण उनके कपड़े भी अस्त व्यस्त थे। बगल में उनके खेत पर लगे नलकूप की कोठरी का ताला भी टूटा पड़ा था।
पोस्टमार्टम के अनुसार तीनों शवों के सिरों में वजनी वस्तु के प्रहार की गंभीर चोटें हैं और हड्डियों में अनगिनत फ्रैक्चर हैं। ग्रामीण की पीठ व कोहनी पर घसीटे जाने के निशान हैं। हत्याएं भी कुछ देर अंतराल में मिड नाइट में हुई हैं।
बेटे की खोज पर खुली दो और हत्याएं, मच गई सनसनी
शुरुआत में यहां सिर्फ साधु की हत्या का शोर मचा था। पुलिस भी एक ही हत्या की जांच में जुटी थी। खुद ग्रामीण का भाई बगल के खेत से चारा काटकर अपने घर पहुंच गया था। मगर उसे नहीं पता था कि उसके भाई व भाभी की लाश उसके ही खेत में पड़ी है।
सुबह तीन बच्चों में बड़ी बेटी भावना, बेटा देशराज और तीसरा छोटा बेटा जाग गए। बड़ी बेटी व छोटा बेटा स्कूल जाने के लिए तैयार होने लगीं। तभी करीब 14 वर्षीय देशराज को लगा कि रात को खेत की रखवाली व दवाई लगाने गए माता-पिता अभी तक नहीं लौटे हैं तो उसने साढ़े सात बजे मां-पिता की खोज शुरू की।
कुछ परिजनों व पड़ोसियों को बताया। इसी बीच गांव में साधु की हत्या की खबर फैली तो परिजनों संग वह खुद खेत पर पहुंच गया। इसी बीच देशराज अपने खेतों पर गया तो उसे रास्ते में नारियल पड़ा मिला और फिर जब अपने नलकूप का ताला टूटा मिला तो उसका माथा ठनक गया।
जब वहां तलाश हुई तो धान के खेत में दोनों लाश मिल गईं। इस सूचना पर पुलिस के भी हा पांव फूल गए। बेटे ने बताया कि मां-पिता रात 11 बजे घर से निकले थे। अभी एक अनुमान के तौर पर माना जा रहा है कि यह दोनों मंदिर के पास से खेतों की ओर जा रहे होंगे या बदमाश यहां से साधु की हत्या कर इनके खेतों की ओर से निकल रहे होंगे। तभी आमना-सामना होने पर इन दोनों की हत्या हुई है।
हत्याकांड एक ही घटना हैं या अलग-अलग इसे लेकर हर दिशा में जांच की जा रही है। कई टीमों का गठन एसपी देहात व एसपी सिटी के नेतृत्व में किया गया है। पोस्टमार्टम के बाद तीनों शवों को उनके परिजनों को सुपुर्द किया गया। परिजनों ने पुलिस मौजूदगी में उनका अंतिम संस्कार कराया है। अभी यह कहना जल्दबाजी होगा कि हत्याएं लूट के इरादे से हुईं हैं या किसी और वजह से। कुछ मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लिया गया है। जल्द ही इस हत्याकांड का राजफाश किया जाएगा।
- अजय कुमार साहनी एसएसपी
पूर्व जन्म की यादों ने रूपदास को बनाया संन्यासी
मृतक पुजारी के छोटे भाई गिर्राज ने बताया कि बाबा रूपदास किशोरावस्था से ही पूर्व जन्म में खुद के साधू महात्मा होने की बात करते थे। पांच भाइयों में दूसरे नंबर के होने के बाद भी उन्होंने शादी नहीं की और ब्रह्मचर्य का पालन किया, जबकि सभी छोटे भाई शादीशुदा हैं।
गिर्राज ने बताया कि पिछले पंद्रह बर्ष से वह इस कई दशक पुराने दुर्रेनी माता मंदिर पर रह रहे थे। पहले मंदिर के नाम पर महज एक टीला ही था लेकिन इन पंद्रह बर्षों में बाबा ने जन सहयोग लेकर मंदिर की चार दीवारी खड़ी करा दी। रहने के लिये एक कमरा और बरामदा बना लिया। साथ ही मंदिर परिसर में दुर्रेनी माता, हनुमानजी व शिव परिवार समेत यज्ञ स्थली भी बनवाई। हालांकि अभी तक मंदिर निर्माणाधीन हैं जिनमें कोई भी मूर्ती स्थापित नहीं है।
7-8 माह पूर्व भी दो बार हो चुकी थी लूटपाट
छोटे भाई गिर्राज ने बताया कि सात-आठ माह पूर्व भी कुछ लोगों ने बाबा की नशीली सुंघाकर बेहोश कर दिया था, जिसके बाद उनके कमरे में रखा कीमती सामान व कुछ धनराशि लूट ली थी। भाइयों ने कार्यवाही करने की कहा तो माता दुर्रेनी देवी के भरोसे रहकर कार्यवाही से मना कर दिया। इस घटना के कुछ दिनों बाद मंदिर से एंपलीफायर भी चोरी चला गया।
सट्टेबाजी व नशाखोरी की संभावनाओं में भी हत्या की वजह तलाश रही है पुलिस
घटना स्थल के बाद ग्रामीणों ने बताया कि अक्सर दिन में यहां जमघट लगा रहता था। गाड़ियों से भी कुछ लोग यहां आया करते थे। चर्चा है कि बाहर से आने वाले लोग सट्टे का नंबर पूछने आते थे और जीतने पर चढ़ावा भी चढ़ाते थे जिसे बाबा मंदिर के निर्माण में लगा देते। वहीं नशेड़ियों का भी मंदिर में आना जाना लगा रहता था। कयास लगाया जा रहा है कि सट्टेबाजी से मिली कोई मोटी रकम को लूटना भी हत्याकांड की वजह हो सकती है। आपको बता दें कि बाबा का शव बरामदे में जमीन पर पड़ा मिला, जबकि बाबा पास में पडे़ तख्त पर सोते थे। साथ ही बाबा के कमरे का कुंडा भी टूटा हुआ था जिससे कमरे में रखी किसी कीमती सामान को लेने की वजह भी स्पष्ट हो रही है।
मंदिर से लेकर गांव तक पहुंचा बुलकानो डांग
साधू की हत्या के बाद मौके पर पहुंचा डाग स्क्वायड का बुलकानो डांग मंदिर के साइड वाले गेट से बराबर में बने जंगल में करीब बीस मीटर तक गया, जिसके बाद बुलकानो गांव के पिछले रास्ते से घर तक गया। यहां करीब दस मीटर की दूूरी पर दो अलग अलग घरों में घुसा लेकिन कोई तथ्य हाथ नहीं आया। दंपती की मौत के बाद भी बुलकानो लगभग सौ मीटर की दूरी तक खेतों में घूमा कई जगह पडे़ खून के धब्बों पर भी पहुंचा लेकिन इसके बाद गर्मी के चलते वह पानी में बैठ गया।
मक्के के खेत में दवा लगाने की कह कर निकले थे दंपती
मृतक योगेन्द्र तथा विमलेश देवी के बडे बेटे देशराज ने बताया कि दोनों पहले भी कई बार वह खेतों में रुक चुके थे लिहाजा ज्यादा सोच विचार नहीं किया गया। जब तलाश शुरू की तो उसे खानदानी ताऊ ओमेन्द्र सिंह के खेत में मां व पिता की लाश मिलीं। मृतक सात भाइयों में छठवें नंबर का था। ग्रामीणों ने बताया कि मृतक योगेन्द्र जमींदार परिवार से ताल्लुक रखता था व बेहद शांत व व्यवहारिक था। परिजनों ने बताया कि मृतक के सबसे छोटे भाई बाबी की ससुराल राजस्थान के राज्यपाल व यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के सगे साढू के यहां है।
तिहरे हत्याकांड को लेकर गुस्सा
इस हत्याकांड को लेकर विहिप नेता रामकुमार आर्य ने जहां नाराजगी जताई। वहीं विश्व हिंदू परिषद विभाग कार्यालय पर एक अति आवश्यक बैठक आयोजित की गई। जिसमें अलीगढ़ जनपद में हो रही लगातार साधुओं की हत्याएं इस विषय पर विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल के पदाधिकारियों ने चर्चा की।
लगातार अलीगढ़ जनपद में साधुओं पर हमला एवं हत्याएं हो रही हैं यह बड़ा ही चिंतन का विषय है । मंदिरों को लक्ष्य बनाकर सुनियोजित तरीके से हत्या की जा रही र्हैं। ू में अतरौली, पाली मुकीमपुर, लोधा थाना क्षेत्रों में इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं अभी तक संतोषजनक कोई भी गिरफ्तारी नहीं हुई । अब यह हत्या हुई है।
विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल शासन से अपेक्षा करता है कि यहां के प्रशासन को आदेशित कर प्रत्येक मंदिर मठ की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और भविष्य में इस तरह की घटना न हो। बैठक में संबोधित करते हुए विश्व हिंदू परिषद के विभाग मंत्री रामकुमार आर्य ने कहा कि अलीगढ़ में साधुओं व मंदिरों पर हो रहे लगातार घटनाओं व हत्यायों की उचित जांच कर अतिशीघ्र अनावरण तथा मंदिर ओर साधुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इधर, पूर्व सांसद कांग्रेस जिलाध्यक्ष चौधरी बिजेंद्र सिंह ने तिहरे हत्याकांड पर दु:ख व्यक्त करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने परिवारों के प्रति संवेदना मृतकों की आत्मा के लिए शांति की प्रार्थना के साथ मृतक परिवारों को 20. 20 लाख रुपया की उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की। एबीवीपी के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य अंकित शर्मा और विभाग संयोजक नानक राजपूत ने भी इस कांड की निंदा की है।