न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले कश्मीर के कुछ सीनियर छात्र नहीं चाहते थे कि मन्नान वानी की जनाजे की नमाज कैंपस में पढ़ी जाए। इसके लिए कश्मीर के छात्रों ने छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन से संपर्क किया और आग्रह किया कि जनाजे की नमाज को रोका जाए।
फैजुल हसन का कहना है कि गुरुवार को दोपहर करीब तीन बजे कश्मीर के एक छात्र का फोन आया कि मुठभेड़ में मन्नान वानी को मार दिया गया है। एएमयू के कैनेडी हॉल में कश्मीर के कुछ छात्र नमाज-ए-जनाजा पढ़ने जा रहे हैं। फैजुल का कहना है कि कश्मीर के कुछ सीनियर छात्र उनके पास आए और नमाज ए जनाजा रोकने का आग्रह किया।
उनका कहना है कि छात्रों के आग्रह के बाद ही वह कश्मीर के छात्रों के पास पहुंचे और उन्हें समझाने का प्रयास किया कि जनाजे की नमाज यहां नहीं पढ़ें। जनाजे की नमाज पढ़ना है तो कश्मीर चले जाएं। यूनिवर्सिटी के दूसरे कई छात्र भी आ गए और उन्होंने भी नमाज का विरोध किया।
फैजुल का कहना है कि समझाने पर 80 प्रतिशत छात्र चले गए। चंद लोग अपनी जिद पर अड़े रहे। प्रोक्टोरियल टीम भी सक्रिय थी ताकि छात्र नमाज नहीं पढ़ सकें। फैजुल ने कहा कि वहां कोई राष्ट्रविरोधी गतिविधियां नहीं र्हुइं। गुुंडे-बदमाश एवं आतंकियों को यूनिवर्सिटी का कोई सपोर्ट नहीं है।