क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
एटा के मदरसे के मुफ्ती हत्याकांड के पैरोकार जाने आलम ने हरदुआगंज मुठभेड़ में मारे गए नौशाद-मुस्तकीम के परिवार की पैरोकारों कर रहे लोगों पर फिर एक तंज कसा है। कहा है कि वह पहले साक्ष्य जान लें, इसके बाद ही पैरोकारी करें। उन्होंने बताया कि रूपवास आश्रम पर साधु व किसान की हत्या के बाद जो मोबाइल लूटा गया था, उस मोबाइल से मुस्तकीम ने ही उसे फोन किया था। उसके मोबाइल में मुस्तकीम की आवाज रिकार्ड है।
यह आवाज अलीगढ़ में मुसलिम समाज के मोअज्जिज लोगों के बीच मुस्तकीम की दादी रफीकन को सुनवाई थी, जिसे उन्होंने सुनते ही पहचान लिया था। इससे बड़ा साक्ष्य और क्या हो सकता है। अगर यह भी गलत है तो मुस्तकीम के पास साधुओं की हत्या के बाद लूटा गया मोबाइल कहां से और क्यों आ गया। उसका मेरे पास रात में कॉल करने का मकसद क्या था।
नौशाद व मुस्तकीम की मां को दिल्ली ले जाकर एएमयू छात्रों द्वारा प्रेस कांफ्रेंस कराने के मुद्दे पर पलटवार करते हुए यह बातें मीडिया से बातचीत में जाने आलम ने कही हैं। एटा के मुफ्ती हत्याकांड में वह पैरोकार हैं। जाने आलम के अनुसार उनके घर के बगल में ही मुफ्ती मदरसा चलाया करते थे। मुकदमा अब अंतिम चरण में है। 29 तारीख को भी उसकी तारीख थी। वह बताते हैं कि उन पर इस पैरोकारी से हटने व हत्या में समझौते के इस कदर दबाव रहे कि वह बता नहीं सकते।
रूपवास आश्रम पर दोहरे हत्याकांड की रात जब उनके पास अंजान नंबर से कॉल आया और फोन करने वाला उल जलूल बातें कर रहा था तो वह खुद समझ नहीं पाए। वह तो गनीमत कि उनके मोबाइल में ऑटो रिकार्डिंग सिस्टम है, इसलिए वह बात उनके मोबाइल में रिकार्ड हो गई। जब इस हत्याकांड के बाद पुलिस उन तक पहुंची तो उन्हें लगा कि उन्हें फंसाने की साजिश हो रही है और पुलिस को सब कुछ बताया।
जाने आलम के अनुसार मुठभेड़ में इन दोनों के मारे जाने के बाद जब अलीगढ़ के सियासी लोगों ने विरोध किया और इन्हें निर्दोष बताया तो मजबूरन हमें पब्लिक व मीडिया के सामने मुंह खोलना पड़ा। उसी समय हमने अलीगढ़ में एक परिचित के आवास पर मुस्तकीम की दादी रफीकन व नौशाद की मां रानी के सामने मोबाइल में रिकार्ड वही कॉल और आवाज सुनाई। रफीकन ने आवाज सुनते ही पहचान ली और बोली कि यह तो हमारे मुस्तकीम की आवाज है। इसके बाद वहां मौजूद तमाम मोहज्जिज व कद्दावर सियासी लोग सन्नाटे में आ गए थे। इसके बाद बात वहीं खत्म हो गई थी।
मर्दों को क्यों आगे नहीं कर रहीं महिलाएं
जाने आलम इन दोनों के परिवारों की पैरोकारी कर रहे एएमयू छात्रों से सवाल पूछते हैं कि आखिर इन महिलाओं से पूछा जाए कि इनके घर पुलिस पहुंचने के बाद से मुस्तकीम का पिता व इनके अन्य भाई आदि मर्द कहां गायब हैं। आखिर उन्हें सामने क्यों नहीं लाया जा रहा है। हर काम, पैरोकारी आदि में महिलाएं ही क्यों आगे आ रही हैं। गढ़ मुक्तेश्वर में दूध व्यापारी पर हमले की उस घटना में भी रफीकन पैरोकारी को जाया करती थीं, जिसमें इन्हें सजा हुई। आखिर अन्य मर्दों को गायब रखने के पीछे क्या मकसद है। उन्हें सामने लाने का क्या डर है।
दोनों महिलाओं के होंगे कोर्ट में बयान:एसएसपी
एसएसपी अजय कुमार साहनी बताते हैं कि नौशाद व मुस्तकीम की मां के अपहरण को लेकर अतरौली में मुकदमा दर्ज है। बेशक उनकी ओर से यह बयान व वीडियो जारी किए गए हैं कि वह मर्जी से गई हैं, उन्हें किसी ने अगवा नहीं किया है। मगर यह कानूनन प्रक्रिया है कि इस तरह के मामलों में उन्हें वापस लाकर कोर्ट में बयान दर्ज कराए जाएंगे। इसके बाद कोर्ट जो तय करेगी, यह कार्यवाही कोर्ट के आदेश पर पूरी होगी। इन दोनों महिलाओं को वापस लाने के लिए पुलिस टीम को लगाया जा रहा है। जल्द ही यह प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।