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मोबाइल नंबरों के सहारे ऑपरेशन मन्नान-ᄋᄂ₩￧ᅦU￙￰¢₩￙

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क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल होने वाले अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) से निष्कासित छात्र मन्नान वानी का पुराना मोबाइल नंबर जांच टीमों के हत्थे लग गया है। यह नंबर उसकी पुरानी गतिविधियों और पुराने लोगों से जुड़े कनेक्शनों को उजागर कर सकता है।

इसे लेकर पुलिस व अन्य जांच टीमें काम कर रही हैं। यह भी साफ हो सकता है कि वह किन लोगों के संपर्क में था और आगे किन लोगों के संपर्क में है। निश्चित तौर पर वह अपने किसी पुराने करीबी के जरिये यह जानने को आतुर होगा कि इस समय अलीगढ़ में चल क्या रहा है।
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हालांकि अभी तक उसके कई प्रमुख करीबियों के नंबर बंद आ रहे हैं। फिर भी उसके व उससे जुड़े मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लेकर टीमें जांच कर रही हैं।

मूलरूप से कश्मीर के लोलाब निवासी एएमयू रिसर्च स्कॉलर रहे मन्नान वानी के 5 जनवरी को हिजबुल ज्वाइन करने और खुद हिजबुल प्रवक्ता द्वारा इसकी पुष्टि करते हुए बयान जारी करने के बाद अचानक एजेंसियों का फोकस एएमयू पर हो गया।

इसके बाद से लगातार यूपी पुलिस, एटीएस व अन्य जांच एजेंसियां एएमयू में उसके नए व पुराने कनेक्शनों की खोज में जुटी हैं। इसी कड़ी में पुलिस ने दो दिन पहले वानी के एएमयू के हबीब हॉल स्थित कमरे में छापामार कार्रवाई कर वहां से तमाम सामान जब्त किया था।

वहां से उसके सामान में तमाम धार्मिक पुस्तकों के अलावा उसके दस्तावेजों से कुछ मोबाइल नंबर मिले और उसका भी मोबाइल नंबर मिला है।

इन नंबरों को आधार बनाकर जांच टीमों ने सर्विलांस के सहारे वानी के पुराने रिश्तों को खंगालना शुरू कर दिया है। इसके अलावा पुलिस इन नंबरों की मदद से उन लोगों को खोजने में जुटी है, जो सबसे ज्यादा करीब रहे। सबसे खास बात यह है कि पुलिस को उम्मीद है कि वह इन्हीं में से किसी न किसी से आज भी संपर्क में होगा। वह अपने पीछे की गतिविधियां जानने को आतुर होगा।

मगर काफी संख्या में नंबर बंद होने के कारण पुलिस टीमें परेशान हैं। अभी जांच टीमें ज्यादा कुछ कहने से बच रही हैं। उन्होंने काफी नंबरों को सर्विलांस पर ले रखा है।
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- इस मामले में अभी ज्यादा कुछ इसलिए नहीं कहा जा सकता कि कमरे की तलाशी में मिले सामान के अलावा कुछ भी पुलिस या जांच टीमों के हाथ नहीं लगा है। फिर भी मन्नान के मोबाइल नंबर व उसके कमरे से मिले अन्य मोबाइल नंबरों के सहारे काम किया जा रहा है। उसके नए पुराने कनेक्शनों को खोजने के प्रयास जारी हैं। कुछ नया मिलने पर ही कुछ बताया जा सकेगा।
-राजेश पांडेय, एसएसपी
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