क्राइम न्यूज, अमर उजाला अलीगढ़
स्लाटर हाउस में अपना माल काटकर लौट रहे कुरैश समुदाय के कुछ मजदूरों को तो पुलिस ने जेल भेज दिया, लेकिन उनके साथ पकड़े गए चार बड़े ठेकेदारों को हित पूर्ति के चलते छोड़ दिया। इसको लेकर सराय रहमान के कुरैश संगठन में आक्रोश है। उन्होंने पूरे मामले की जानकारी भाजपा के पूर्व प्रदेश मंत्री राजेंद्र वार्ष्णेय चीफ को भी दी है।
सराय रहमान कुरैश समुदाय की ओर से कहा गया है कि जब तक सरकारी स्लाटर हाउस शुरू नहीं हो जाते हैं, तब तक निजी स्लाटर हाउसों में माल काटनेे की इजाजत है। इसी के चलते सराय रहमान के छह मजदूर अनूपशहर रोड स्थित एक स्लाटर हाउस पर गए थे। जब यह लोग वापस लौट रहे थे, तो इनके साथ देहली गेट के चार बड़े ठेकेदार भी थी। पुलिस ने दबिश देकर सभी 11 लोगों को पकड़ लिया। समुदाय की ओर से बताया गया कि इस पकड़ के पीछे एक वजह दो दिन पहले हुई घटना भी है। जिसमें सिकंदराराऊ और छतारी गुट के बीच टकराव हुआ और फायरिंग की स्थिति बन गई। इसी घटना के कारण पुलिस को मजदूरों और ठेकेदारों के अनूपशहर रोड पर मूवमेंट की सूचना दी गई थी। सभी की गिरफ्तारी के बाद कुरैश समुदाय पहले इलाका पुलिस प्रभारी से मिलने पहुंचे, लेकिन उन्होंने मिलने से इनकार कर दिया।
इसके बाद सभी लोग महापौर मो. फुरकान के पास पहुंचे तो उन्होंने पुलिस के आला अधिकारियों से बात की। मो. फुरकान को बताया गया कि आपसी रंजिश के चलते जो घटना हुई है, उसमें इन लोगों की गिरफ्तारी हुई है। इसके बाद रसूख के चलते बड़े ठेकेदारों को तो छोड़ दिया गया, लेकिन सराय रहमान के सभी छह मजदूरों को जेल भेज दिया गया। जबकि उनका न तो रंजिश की घटना से कोई लेना देना है और न गलत तरीके से गोश्त काटने से कोई लेना देना है। यह लोग फैक्ट्री में जमाकर माल काटते हैं और दुकान पर लाकर बेचते हैं। इस मामले से आक्रोशित कुरैश समुदाय ने पूरे मामले की जानकारी गुरुवार को भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र वार्ष्णेय चीफ को दी है।