न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में एलएलएम में दाखिला के लिए प्रवेश परीक्षा देने आए एक अभ्यर्थी ने धर्म के आधार पर प्रवेश परीक्षा देने से रोकने का आरोप लगाकर सनसनी फैला दी। जबकि एएमयू प्रशासन का कहना है कि अभ्यर्थी प्रवेश परीक्षा के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार पात्र ही नहीं है। इसकी सूचना पूर्व में लॉ फैकल्टी की वेबसाइड पर भी दी जा चुकी है।
एएमयू के लॉ फैकल्टी में शुक्रवार को एलएलएम में दाखिला के लिए प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया गया। 25 सीट के विरुद्ध 367 छात्र-छात्राओं ने आवेदन किया था। इगलास के गांव तेहरा मुंज निवासी सत्यवीर सिंह पुत्र स्व. वेदराम परीक्षा देने पहुंचा तो उसे परीक्षा में शामिल होने से रोक दिया गया। सत्यवीर सिंह ने आरोप लगाया कि हाथ में कलावा एवं हिंदू धर्म का होने के कारण उसे परीक्षा से रोका गया है। उन्होंने विधि विभाग के कर्मचारियों पर अभद्रता एवं अपशब्दों का प्रयोग करने का भी आरोप लगाया है। डीएम से मुलाकात नहीं होने पर सत्यवीर सिंह ने एसएसपी कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई। उन्होंने मानव संसाधन विकास मंत्री से भी शिकायत की है।
वहीं अभ्यर्थी के आरोप से विश्वविद्यालय के अधिकारी हतप्रभ हैं। एएमयू पीआरओ ऑफिस के एमआईसी प्रो. शाफे किदवई ने सत्यवीर सिंह के आरोप को सिरे से नकार दिया। उनका कहना है कि गाइड लाइन के अनुसार एलएलएम की प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए एलएलबी/बीएएलएलबी में 55 प्रतिशत अंक अनिवार्य हैं। इससे कम अंक होने पर कोई भी अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल नहीं हो सकता।
विश्वविद्यालय के एडमिशन गाइड लाइन में साफ तौर से इसका उल्लेख किया गया है। सत्यवीर सिंह ने डॉ. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी आगरा से वर्ष 2016 में एलएलबी की डिग्री ली है। परीक्षा में उन्होंने 2800 में 1446 अंक यानी 51.64 प्रतिशत अंक हासिल किया था। ऐसे में वह परीक्षा के लिए पात्र नहीं है। लॉ फैकल्टी की वेबसाइट पर 21 जून को 16 अपात्र अभ्यर्थियों के नामों की सूची डाल दी गई थी, जिसमें 7 वें नंबर पर सत्यवीर सिंह का नाम था। सत्यवीर सिंह गलत आरोप लगाकर एएमयू को बदनाम करना चाहते हैं। विधि विभाग के अध्यक्ष प्रो. जावेद तालिब एवं कंट्रोलर मुजीब उल्लाह जुबैरी ने कहा कि सत्यवीर सिंह का आरोप दूषित मानसिकता से प्रेरित है। एएमयू में छात्रों के साथ भेदभाव नहीं किया जाता है।