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आनर किलिंग की साइड स्टोरी-ᄋᄂ₩￧ᅦU￙￰¢₩￙

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क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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महावीर नगर में बाप के हाथों मौत का शिकार हुई कविता की शादी बिजली विभाग के एक जूनियर इंजीनियर के साथ तय हुई थी। लेकिन उसके घर से लापता होने पर यह रिश्ता टूट गया था।

इसके बाद परिवार कविता की पसंद के युवक से शादी करने पर सहमत हो गया था। पिता बस इतना चाहता था कि वह घर से गायब होना बंद कर दे क्योंकि इससे बहुत बदनामी हो रही है। इसके बावजूद कविता मनमानी करने जा रही थी। कविता की जिद और आवेश में लिए गए पिता के एक फैसले से पूरा परिवार बिखर गया।
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कविता एक निजी डिग्री कालेज से बीएससी कर रही थी। पिता महेंद्र कुमार उसके लिए अच्छे रिश्ते की तलाश कर रहे थे। आसपास के लोगों के मुताबिक महेंद्र ने हमेशा यही चाहा था कि कोई सरकारी सेवारत युवक कविता का हाथ थामे।

जब उन्हें विजयगढ़ के किसी युवक से कविता का संपर्क होने की बात चली तो बहुत झटका लगा। उन्होंने कविता को बहुत समझाने की कोशिश की कि वे उसके अच्छे भविष्य के लिए सोच रहे हैं। यही कारण था कि बिजली विभाग में एक जूनियर इंजीनियर के साथ कविता का रिश्ता तय किया गया।

लेकिन कविता के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। विजयगढ़ के युवक के लिए अपनी शादी से करीब एक महीने पहले कविता घर छोड़कर चली गई। कुछ दिनों तक तो इस बात की भनक जहां रिश्ता तय हुआ था वहां नहीं हुई।

बाद में उन्हें भी पता लग गया तो कविता का रिश्ता टूट गया। घर में इस बात को लेकर भी बहुत झगड़ा था कि बड़ी मुश्किल से इंजीनियर के साथ रिश्ता तय किया लेकिन वह कविता की नादानी से टूट गया।

इसके बाद भी परिवार इस बात पर सहमत हो गया कि वह जहां चाहती है, उसकी शादी वहां कर देंगे। लेकिन वह बार बार घर से जाना और लापता हो जाना बंद करे। मंगलवार को भी घर में इसी बात पर झगड़ा हुआ था। कविता ने जाने की जिद की तो बात बढ़ती गई और यह घटना हो गई।

वारदात के बाद मां हुई बेहोश
जिस वक्त घर में झगड़ा हुआ और गोली चली उस वक्त कविता की मां माला भी घर पर मौजूद थी। गोली चलने के बाद बेटी का चिथड़े हुआ भेजा और उसका शव देखकर माला बेहोश हो गई। उसकी हालत खराब हो गई। माला को पास के किसी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया। इस दौरान मां को बताया गया कि कविता जख्मी है और उसका इलाज चल रहा है। लेकिन बाद में नर्सिंग होम से माला कहीं चली गई। पूरे मामले में परिजन सामने आने से बच रहे हैं।

यह सोचना अपने आप में विचित्र है कि जिस संतान को गोद में खिलाया होता है उसकी जान ले ली जाती हैे। लेकिन यह सब आवेश मे होता है। हत्या करने वाले को लगता है कि उसकी संतान के कदम से उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल हो रही है। जब वह रास्ते से गुजरेगा तो लोगों की निगाहें और सवालों को कैसे सामना करेगा। यही बाद उसके आवेश को बढ़ा देती है और ऐसी घटनाएं होती हैं।
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- डॉ. ज्ञानेंद्र मिश्रा, वरिष्ठ समाजविज्ञानी

इस घटना में जो हुआ है वह पिछले कुछ घटनाक्रमों से पैदा हुआ आवेश और उसका विस्फोट है। जब आवेश चरम पर होता है तो निर्णय लेने की क्षमता नहीं होती है। उस अनिर्णय वाली स्थिति में संवेग जिस तरफ धकेल देते हैं वैसा ही व्यक्ति कर देता है। लेकिन जब थोड़ा अहसास होता है तो व्यक्ति फैसला लेता है जैसा कि महेंद्र ने लिया और समर्पण किया। बाद में उसे अहसास हुआ कि उसने जो किया है वह गलत है।
- डॉ. रामकुमार, वरिष्ठ मनोविज्ञानी
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