क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़।
हरदुआगंज मुठभेड़ में मारे गए छह सिलसिलेवार हत्याओं के आरोपी बदमाश मुस्तकीम और नौशाद के बारे में आए दिन चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आ रही हैं। पुलिस के एक नए खुलासे में पता चला है कि नौशाद और मुस्तकीम के परिजन मुजफ्फरनगर के ककराला थाना भोपा में भी पता बदलकर रह रहे थे।
वहां उन्होंने वर्ष 2004 में तीन लोगों की हत्याएं कर क्षेत्र को दहला दिया था। काफी बवाल भी हुआ था। इन लोगों को वहां पुलिस ने जेल भेजा और उन्हें अदालत से आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।
जिला मुजफ्फरनगर के थाना भोपा क्षेत्र के गांव ककराला निवासी साजिद पुत्र रफीक और सलीम पुत्र जाफर शुक्रवार को अतरौली कोतवाली पहुंचे। उन्होंने बताया कि टीवी पर समाचार देखने के दौरान उन्हें रफीकन रोती हुई दिखीं जो एनकाउंटर में मारे गए बदमाश मुस्तकीम की दादी हैं।
वह अपना नाम रफीकन बता रही थीं और अलीगढ़ पुलिस पर आरोप लगा रही थीं। साजिद व सलीम ने अतरौली पुलिस को बताया कि रफीकन हमारे यहां जमीला नाम से रह रही थीं। इनके परिवार के अन्य लोगों के नाम भी दूसरे थे।
रफीकन उर्फ जमीला के पति व अन्य परिजनों ने रफीक पुत्र मजीद व जावेद पुत्र जमील व एक अन्य की झोपड़ी में बांधकर जिंदा जला दिया था। इसकी रिपोर्ट सायरा ने दर्ज कराई थी। इस मामले में आठ लोगों के खिलाफ पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जेल भेजा था। 16 अगस्त 2012 को कोर्ट ने सभी आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
नौशाद-मुस्तकीम के परिवार के पुरुष हैं नदारद
लोगों में चर्चा है कि नौशाद और मुस्तकीम के परिवार को अब नेताओं का भी साथ मिल रहा है तो उनके परिवार के पुरुष सदस्य सामने क्यों नहीं आ रहे हैं? यह लोग बेकसूर हैं तो वह छिप क्यों रहे हैं? पुलिस के सामने नहीं तो कम से कम नेताओं के सामने तो अपने बारे में बता सकते हैं? इनके परिवार की महिलाएं ही नेताओं के पास जाकर अपने बयान दर्ज करा रही हैं। पुरुषों के नदारत होने से तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कोतवाल प्रवेश राणा का कहना है कि एनकाउंटर के बाद तमाम नेता इनके घर पहुंचे हैं। इनके परिवार की महिलाएं दिल्ली तक जाकर सफाई पेश कर चुकी हैं लेकिन पुरुष सदस्य सामने नहीं आ रहे हैं।