क्राइम डेस्क, अमर उजाला, खैर।
कस्बे के प्रमुख व्यापारी विजय गंगल हत्याकांड की गुत्थी अबूझ पहेली बनती जा रही है। हत्या आरोपी पुनीत को रिमांड पर लेकर भी पुलिस हत्या का राज नहीं उगलवा सकी है, जबकि उसे रिमांड पर लेने से पहले पुलिस उसे राजदार बताते हुए दावा कर रही थी कि सुपारी देने वाले और हत्या क्यों की गई इन सवालों का जवाब जल्द सबके सामने होगा।चौबीस घंटे की रिमांड पर पुलिस पूछताछ में पुनीत ने पुलिस को मनीष और अभिषेक के नाम तो बताए लेकिन इससे आगे कुछ नहीं बता सका।
पुलिस उसको साथ लेकर अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए फरीदाबाद, नोएडा व दिल्ली तक घूमती रही। लेकिन उसके साथी मिलना दूर वारदात में प्रयुक्त कार और बाइक तक बरामद नहीं हो सकी। बुधवार को रिमांड अवधि पूरी होने से पहले ही पुलिस ने उसे जेल में दाखिल कर दिया।
12 अप्रैल की शाम व्यापारी विजय गंगल की उनकी दुकान के बाहर बाइक सवार हमलावरों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। मामले में खुलासे के लिये एसओजी, सर्विलांस से लेकर एसटीएफ को लगाया गया था। 7 जून को सूरज उर्फ प्रदीप पुत्र राधेश्याम निवासी सोफा, खैर व कालीचरन उर्फ कालू निवासी लोहई भालई, थाना मांट मथुरा को गिरफ्तार कर हत्या के आरोप में जेल भेजा गया था। उनके पास से हत्या में प्रयुक्त 9 एमएम की पिस्टल की बरामदगी भी दिखाई गई थी। उनके द्वारा ही शार्प शूटर पुनीत पुत्र लोकेश अग्रवाल निवासी पिलखुआ, हापुड़ का नाम बताया गया था। पुनीत जेल चला गया था जिसे रिमांड पर पुलिस लाई थी।
इंस्पेक्टर खैर अरविंद राठी के मुताबिक पूछताछ में पुनीत ने बताया कि सोफा निवासी सूरज काफी दिनों से अपनी बुआ के यहां पिलखुआ में रह रहा था। वहीं उसकी सूरज से मित्रता हो गई थी। खैर के ही एक व्यक्ति ने विजय गंगल की हत्या करने के लिए पुनीत को पांच लाख रुपये की सुपारी दी थी। पुनीत ने अपने साथ सूरज को शामिल किया था। औरैया निवासी मनीष और खैर थाना क्षेत्र निवासी अभिषेक भी वारदात में शामिल रहा था। अभिषेक ने ही सूरज व पुनीत को बाइक व पिस्टल मुहैया कराये थे।
पुनीत ने भालई निवासी कालीचरन उर्फ कालू से पिस्टल के पांच कारतूस एक शादी में जरूरत बताकर खरीदे थे। मनीष ने हत्या के बाद भागने के लिये कार का इंतजाम किया था। सूरज व पुनीत ने हत्या को अंजाम दिया था। हत्या के बाद वह बाइक को मोहल्ला उपाध्याय में पथवारी मंदिर के समीप अभिषेक को सौंप गए थे। दोनों वहां से पैदल अनाज मंडी पहुंचे थे। वहां पहले से ही मनीष अपनी पुरानी रिट्ज कार लेकर इंतजार कर रहा था। दोनों उसमें बैठकर मनीष के साथ कालीचरन के घर भालई गए थे। वहां से अगले दिन नोएडा भाग गए।
पुलिस की यह कहानी सही है या गलत यह तो कहना मुश्किल है, लेकिन यह मृतक के परिजनों व करीबियों के गले कतई नहीं उतर रही है। पुलिस के मुताबिक पुनीत ने बताया है कि वह नहीं जानता, अभिषेक को पता है कि हत्या की सुपारी देने वाला कौन है? पुलिस उसके पकड़ने पर ही साजिश रचने वाले का नाम खुलने की बात कह रही है।
पुनीत ने इगलास में डेयरी संचालक के घर डाली थी डकैती
हत्यारोपी पुनीत और मनीष मिलकर कई वारदातों को अंजाम दे चुके हैं। पुनीत के खिलाफ थाना इगलास, पिलखुआ व जारचा, नोएडा में लूट हत्या और डकैती के कई मुकदमे दर्ज हैं। पुनीत ने मार्च 2017 में अन्य के साथ मिलकर इगलास के डेयरी संचालक यशपाल सिंह के घर डकैती डाली थी। उसके हिस्से में 90 हजार रुपये मिले थे। सूत्रों की मानें तो विजय गंगल की हत्या के बाद पुनीत गैंग का एटा में किसी की हत्या का प्लान था। परंतु विजय गंगल की हत्या के बाद सब अलग अलग चले गये थे, इसलिये वारदात को अंजाम नहीं दे सके। यह बात भी पुनीत ने पुलिस को बताई है लेकिन इंस्पेक्टर ने ऐसी किसी बात से इंकार किया है।
धंधे का उसूल है नाम बताया तो रेट खराब हो जाएंगे
शार्प शूटर पुनीत पुलिस की पूछताछ में एक ही जवाब रटता रहा कि धंधे का उसूल है कि सुपारी देने वाले का नाम नहीं बता सकते। यदि नाम बताया तो बाजार में रेट खराब हो जाएगा। इंस्पेक्टर अरविंद राठी के अनुसार उससे कई बार की पूछताछ में विजय गंगल की हत्या में सुपारी देने वाले की जानकारी पाने का प्रयास किया गया लेकिन वह धंधे का उसूल बताकर जानकारी छिपाता रहा।