अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़
1990 से 2000 के दशक में वो एक दौर था, जब अतरौली तहसील के बुलंदशहर सीमा पर बसे गांव चकाथल में पत्ता भी हिलता था तो पुलिस प्रशासन के पसीने छूट जाया करते थे। दो दशक तक प्रधानी की रंजिश में इस गांव में जमकर गोलियां तड़तड़ाईं और खूब खून खराबा हुआ।
जिले की सबसे चर्चित चकाथल की रंजिश की शुरुआत को लेकर किवदंतियां तो तरह-तरह की हैं। मगर ‘तंत’ (बारिश के मौसम में पशुओं की बीमारी की रोकथाम को गांव में सामूहिक रूप से की जाने वाली विशेष पूजा) पूजा की रात 1990 के आसपास यहां करीब 500 मीटर दूरी पर रहने वाले जाट व ब्राह्मण समाज के दो परिवार ऐसे आमने-सामने आए कि गांव का भाईचारा ही बिगड़ गया।
फिर जो खूनी खेल शुरू हुआ, उसे रोकना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हो गया। हालांकि समय बीतते-बीतते और लोगों की जान जाते-जाते दोनों परिवारों के सदस्यों के सीने का गुस्सा शांत हुआ। दूसरी वजह कानूनी शिकंजा भी रही। तब कहीं 2005 में आकर इस रंजिश पर एक ब्रेक लगा, जो आज भी लगा हुआ है। मगर आज भी दोनों ही परिवारों के लोग आमने-सामने नहीं पड़ते और चुनाव में आज भी आमने-सामने ही रहते हैं।
आज तक इन्हीं परिवारों में है प्रधानी
गांव चकाथल के जाट समाज के डंबर सिंह व ब्राह्मण समाज के ओमप्रकाश शर्मा के परिवार पहली बार 1990 के आसपास डंबर के प्रधानी जीतने पर आमने-सामने आए। इसके बाद इन परिवारों में रंजिश के चलते हत्याएं शुरू हुईं तो दोनों ही परिवार प्रधानी में हर बार आमने-सामने रहने लगे और कभी एक पक्ष तो कभी दूसरा पक्ष प्रधान बनता था। वर्तमान में भी ब्राह्मण पक्ष से जेल में निरुद्ध बिंटू शर्मा की पत्नी गुड्डी देवी प्रधान हैैं। जगवीर सिंह की हत्या भी देवेंद्र की हत्या के बदले हुई थी। इन परिवारों में अब तक नेतृत्व डंबर सिंह व ओमप्रकाश शर्मा के बाद देवेंद्र व जगवीर सिंह ने किया था। इसके बाद अब ब्राह्मण पक्ष से बिंटू व जाट पक्ष से महावीर सिंह कर रहे हैं।
एसएसपी की मौजूदगी में पंचायत में लहराए थे तमंचे
2010 के पंचायत चुनाव की तैयारियों के क्रम में 2009 में इस गांव में अमन कायम रखने के लिए पुलिस की ओर से पंचायत रखी गई। इस पंचायत में तत्कालीन एसएसपी असीम अरुण मौजूद थे। उस पंचायत में भी तमंचे लहराए गए। इस पर खुद एसएसपी ने हैरानी जताई थी और कहा था कि अगर पुलिस के सामने यह हाल है तो पीछे क्या रहता होगा। कुल मिलाकर वह पंचायत बिना किसी नतीजे पर पहुंचे अधिकारी लौट गए थे।
दूसरे पक्ष के तीन लोग जमानत पर आए
इस रंजिश में ब्राह्मण पक्ष के प्रमोद शर्मा, अखिलेश, मुनीष व बिंटू को पिछले वर्ष उम्रकैद की सजा हुई थी, जिनमें से बिंटू को छोड़कर तीन लोगों जमानत मिल गई है।