तीन माह में देना होगा चुनावी खर्च का ब्यौरा
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
किसी भी चुनाव में उतरने की पहली शर्त होती है कि पूरे अभियान के दौरान प्रत्याशी ने किस मद में कितना खर्च किया और यह खर्च चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित खर्च सीमा के अंतर्गत ही होना चाहिए। अन्यथा की स्थिति में प्रत्याशी की जमानत जब्त करने का प्रावधान है।
निकाय चुनाव 2017 के परिणाम आ चुके हैं। परिणाम के तीन माह के अंदर सभी प्रत्याशियों को अपने अपने अभियान में हुए खर्च का ब्यौरा देना है। लेकिन अब तक किसी प्रत्याशी ने चुनावी खर्च का ब्यौरा नहीं सौंपा है।
हालांकि अभी निर्धारित अवधि काफी दूर है, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि किस प्रत्याशी ने अपने अभियान पर कितना खर्च किया और यदि खर्च किया तो क्या वह आयोग द्वारा निर्धारित सीमा के अंतर्गत है या अधिक। सहायक निर्वाचन अधिकारी नगर निकाय कौशल कुमार ने स्वीकार किया कि अब तक किसी प्रत्याशी ने खर्च का ब्यौरा नहीं दिया है।
उन्हें अधिकतम 90 दिन के अंदर खर्च का ब्यौरा देना होगा। चाहे वे चुनाव जीते हो, अथवा नहीं।
आयोग द्वारा निर्धारित अधिकतम चुनावी खर्च की सीमा
- मेयर-20 लाख रुपये
- पार्षद-02 लाख रुपये
- नगर पालिका चेयरमैन-06 लाख रुपये
सदस्य नगर पालिका-1.50 लाख
अध्यक्ष नगर पंचायत-1.50 लाख
सदस्य नगर पंचायत-30 हजार