क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
महानगर के सिविल लाइंस के मोहल्ला सुदामापुरी में बुधवार की रात एक मानसिक रूप से अस्वस्थ युवक की हरकत ने पुलिस को पसीना छुड़ा दिया। इस युवक ने अचानक मंदिर में देवी की मूर्ति खंडित कर दी। जब लोगों को भनक लगी तो वहां भीड़ जमा हो गई और पुलिस बुला ली। पुलिस ने शहर में अफवाह फैलने से पहले ही नई मूर्ति स्थापित कराई और आरोपी को हिरासत में ले लिया। हालांकि जब परिजन पहुंचे और उसके मानसिक रूप से अस्वस्थ होने का प्रमाण पुलिस को दिया तो पुलिस ने उसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
वाकया इस तरह है कि चंदौसी का एक युवक पेशे से निजी स्कूल का शिक्षक था। इसी बीच मानसिक रूप से अस्वस्थ होने पर नौकरी चली गई। शिक्षण कार्य के दौरान महानगर की रामबाग कालोनी निवासी एक युवक से उसकी दोस्ती हो गई। उसने अपने दोस्त से अलीगढ़ में नौकरी दिलाने की बात कही। दोस्त ने उसे यहां नौकरी भी दिलवा दी और अपने ही मोहल्ले में किराये पर कमरा भी दिलवा दिया। यहां रहने के दौरान मानसिक रूप से अस्वस्थ होने से उसने तरह तरह की हरकतें शुरू कर दीं।
इस पर मकान स्वामी ने इस युवक के सामने प्रस्ताव रखा कि या तो वह माता-पिता को बुलाए अथवा मकान खाली कर दे। इस पर बुधवार की सुबह उसके माता, पिता यहां आ गए और उसे साथ ले जाने की तैयारी करने लगे। इसी प्रयास में देर रात वह उसे लेकर रेलवे स्टेशन पहुंचे। वहां युवक को टिकट खरीदने भेजा गया, मगर उस समय टिकट विंडो बंद थी और युवक टिकट विंडो से ही लापता हो गया। वह सीधे सुदामापुरी पहुंचा और वहां बगीची वाले मंदिर में घुसकर मूर्ति खंडित कर दी।
यह देख स्थानीय लोग एकत्र हो गए और सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई। इसी बीच खोजते हुए उसकी मां भी पीछे से पहुंच गई। हालांकि पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया था। मगर मां ने उसकी बीमारी के विषय में बताया तो पुलिस ने उनकी बातें सुन इलाज के दस्तावेज मंगा लिए। इधर, मंदिर में रात में ही दूसरी मूर्ति स्थापित कराई। इंस्पेक्टर के अनुसार जांच में पाया गया कि युवक का वास्तव में मानसिक अस्वस्थ होने का इलाज चल रहा है। इसलिए उसे परिजनों की सुपुर्दगी में दे दिया गया। वह उसे अपने साथ ले गए।