न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के अध्यक्ष बृजलाल ने कई संगठनों एवं प्रबुद्ध लोगों की शिकायत के बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) को नोटिस दिया है। इन्होंने आयोग के अध्यक्ष से एएमयू में संविधान के अनुसार आरक्षण लागू कराने की मांग की है। दूसरी ओर एएमयू प्रशासन का कहना है कि अभी उनको नोटिस नहीं मिला है। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण ज्यादा कहना उचित नहीं होगा।
आयोग के समक्ष अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं विमुक्त जातियों संबंधी संयुक्त समिति विधानसभा, उत्तर प्रदेश के सभापति रामनरेश रावत की ओर से शिकायत की गई थी कि एएमयू में आज तक अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों को निर्धारित मात्रा में प्रवेश एवं नियुक्ति में आरक्षण नहीं दिया गया है, जबकि एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का स्पष्ट निर्देश है कि 15 प्रतिशत अनुसूचित जाति और 7.5 प्रतिशत आरक्षण अनुसूचित जनजाति के लोगों को नियुक्ति एवं प्रवेश में देय है। इसी तरह जगत गुरू कबीर फाउंडेशन की ओर से भी एएमयू में एससी, एसटी को आरक्षण दिलाने की मांग की गई। अखिल भारतीय कोली/कोरी समाज जनपद बदायूं की ओर से भी आयोग को पत्र लिखकर संविधान प्रदत्त आरक्षण व्यवस्था दिलाने की मांग की गई।
बुद्ध एजूकेशन सोसाइटी लखनऊ ने आयोग को पत्र लिखकर संविधान प्रदत्त अधिकार एससी, एसटी को आरक्षण दिलाने की मांग की थी। ऐसे ही पत्र उत्तर प्रदेश भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के पूर्व उपाध्यक्ष रामवीर सिंह भैयाजी, भारतरत्न बोधिसत्व बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर महासभा, लखनऊ के महामंत्री अमरनाथ प्रजापति आदि द्वारा भी आयोग को लिखे गए। सभी ने एएमयू में एससी एवं एससी के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने की गुहार आयोग से लगाई थी।
उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के नोटिस के संबंध में अभी कोई सूचना नहीं है। यदि यह आती है तो उसका जवाब दिया जाएगा। फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इस पर किसी तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार किया जाएगा। - प्रो. शाफे किदवई, मेंबर इंचार्ज एएमयू पीआरओ ऑफिस
एएमयू में मची खलबली
उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के अध्यक्ष बृजलाल ने एएमयू को नोटिस जारी कर एक महीने में आरक्षण से संबंधित आख्या मांगी है। एक दिन पहले ही राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष प्रो. रामशंकर कठेरिया ने भी आरक्षण को लेकर तल्खी दिखाई थी। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि आरक्षण को लेकर एएमयू की नीयत साफ नहीं है। कठेरिया ने भी एएमयू को अल्पसंख्यक स्वरूप होने से संबंधित साक्ष्य एक महीने में पेश करने का वक्त दिया है। राष्ट्रीय एवं राज्य के आयोग से नोटिस की चर्चा के बाद एएमयू में खलबली मच गई है। एएमयू के अधिकारी विधिक राय लेने में जुट गए हैं। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट में भी एएमयू के अल्पसंख्यक स्वरूप को लेकर मामला विचाराधीन है।