प्रो. इरबीन हबीब। संवाद
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले के ‘जनसंख्या का असंतुलन’ के बयान पर बयानबाजी तेज हो गई है। होसबाले के बयान पर प्रख्यात इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब ने कहा कि अभी जनगणना हुई नहीं, लेकिन इस तरह का बयान देना गैर जिम्मेदाराना और बेवजह है।
प्रो. इरफान ने कहा कि वर्ष 2011 में जनगणना हुई थी। वर्ष 2021 में जनगणना होनी थी, लेकिन किसी कारणवश नहीं हो पाई थी। अब 2022 में जनगणना हो रही है। इसके बाद पता चल जाएगा कि जनसंख्या की असल सूरत कैसी है। अभी शोर मचाने की कोई जरूरत नहीं है। एएमयू इम्प्लायी यूनियन के महासचिव कामरेड शमीम अख्तर ने कहा कि जनसंख्या अभिशाप नहीं, बल्कि पूंजी होती है।
यह बात सही है कि जनसंख्या विस्फोटक परेशानी का सबब है, लेकिन इससे निपटने के लिए साक्षरता और गरीबी को दूरी करने की जरूरत थी, जो नहीं हो रहा। केवल असल मुद्दों से भटकाया जा रहा है। वरिष्ठ समाजसेविका मारिया आलम ने कहा कि अब चुनाव करीब है, तो ऐसे में इसी तरह के बयान हैं, जो मुस्लिम, अनुसूचित जाति विरोधी होंगे।
जिनके वोट के आधार पर भाजपा सत्ता में आई है, उनके लिए कुछ कर नहीं कर पाए है। उन्हें न तो रोजगार दे पाए और न ही कानून का संरक्षण। उन्होंने कहा कि संघ का हमेशा मुस्लिम विरोधी मानसिकता रही है। उनकी कथनी और करनी में फर्क है। किस देश का विभाजन जनसंख्या असंतुलन के कारण हुआ है, उन देशों का नाम भी बताएं।