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Aligarh: वायरल बुखार संग बढ़ रही कोरोना की रफ्तार, अस्पतालों में लगातार हो रहा मरीजों की संख्या में इजाफा

Tue, 09 Aug 2022 09:44 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

सोमवार को मलखान सिंह जिला अस्पताल व दीनदयाल अस्पताल खुलते ही मरीजों की भीड़ लगने लगी। दिन भर में जिला अस्पताल में 1700 व दीनदयाल अस्पताल में 1500 मरीजों की ओपीडी दर्ज की गई। इनमें 60 प्रतिशत से अधिक वायरल बुखार से पीड़ित मरीज रहे।
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पंडित दीनदयाल चिकित्सालय की ओपीडी में डॉक्टर का इंतजार करते मरीज व तीमारदार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बारिश की शुरुआत के बाद डायरिया पर अंकुश लगा, मगर वायरल बुखार ने सिरदर्द बढ़ा दिया है। आलम ये है कि अस्पतालों में वायरल बुखार से पीड़ितों की सुबह से ही भीड़ लगने लगती है। यह बुखार भी इस हद तक पहुंच रहा है कि इसी में कोरोना तक के लक्षण पाए जा रहे हैं और प्लेटलेट्स तक की जरूरत पड़ रही है। इसको लेकर स्वास्थ्य महकमा भी चिंतित है और एक ही बात कही जा रही है कि अगर सावधानी न बरती तो आने वाले समय में दिक्कत हो सकती है।

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ये है बीमारी की स्थिति
सोमवार को मलखान सिंह जिला अस्पताल व दीनदयाल अस्पताल खुलते ही मरीजों की भीड़ लगने लगी। दिन भर में जिला अस्पताल में 1700 व दीनदयाल अस्पताल में 1500 मरीजों की ओपीडी दर्ज की गई। इनमें 60 प्रतिशत से अधिक वायरल बुखार से पीड़ित मरीज रहे। चूंकि दोनों ही अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है तो ओपीडी में दिखाने के लिए लाइन लगी रही और घंटों इंतजार करना पड़ा। जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. ईश्वर देवी बत्रा बताती हैं कि दिन की ओपीडी में अधिकांश मरीज वायरल बुखार के पीड़ित थे। जिनमें बच्चे व घर से बाहर ज्यादा घूमने वाले बड़े, नवयुवक अधिक हैं। इसी तरह दीनदयाल के सीएमएस डॉ.अनुपम भाष्कर कहते हैं कि अब डायरिया नियंत्रित हुआ है। मगर मौसम के लगातार बदलने के कारण वायरल बुखार का प्रकोप है। यह अभी कुछ दिन और झेलना हो सकता है।

दस फीसदी मरीजों को पड़ रही प्लेटलेट्स की जरूरत
हालांकि, यह डेंगू या मलेरिया के लक्षण नहीं। मगर इस वायरल बुखार में मरीज को कमजोरी अधिक हो जाने के कारण प्लेटलेट्स तक की जरूरत पड़ रही है। ऐसा जिला अस्पताल व दीनदयाल की ब्लडबैंक के आंकड़े बताते हैं कि दस फीसदी मरीजों को प्लेटलेट्स की डिमांड हो रही है। इस बुखार में गले में खराश, खांसी, सिर में दर्द, हाथ पैर टूटने के साथ कमजोरी प्रमुख लक्षण हैं, जो लोग अपनी कमजोरी को नियंत्रित कर ले रहे हैं, वे तीन दिन में ठीक हो जा रहे हैं। जहां कमजोरी पर ध्यान नहीं दिया गया, वहीं प्लेटलेट्स तक गिरने लगते हैं।
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सावधानी की कमी बढ़ा रही कोरोना की रफ्तार
डॉक्टरों के अनुसार, वैसे ये बहुत चिंता का विषय नहीं, क्योंकि अभी तक कोई भी कोविड संक्रमित मरीज गंभीर स्थिति में नहीं पाया गया है। बुखार के दौरान जांच कराने पर मरीजों को कोविड की पुष्टि हो रही है। अभी तक किसी मरीज को अस्पताल में भरती करने की जरूरत नहीं हुई है। मगर चिंता का विषय ये है कि लोग सावधानी नहीं बरत रहे हैं। सामाजिक दूरी, मास्क न लगना अब सामान्य बात हो गई है। हालांकि कोविड की रफ्तार को देखते हुए जांच की प्रक्रिया बढ़ा दी गई है। कोविड जांच प्रभारी डॉ. राहुल कुलश्रेष्ठ के अनुसार देहात के सभी पीएचसी व शहरी अस्पतालों में जांच जारी हैं। प्रतिदिन 3 से 4 हजार जांच कराई जा रही हैं। इस मौसम में बुखार में कोविड पाए जाने को लेकर जांच करने वाले एलटी को प्रशिक्षित भी किया जा रहा है।

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दीनदयाल अस्पताल में कोविशील्ड वैक्सीन की कमी
कोविड की रफ्तार बढ़ते ही अस्पतालों में एहतियाती डोज लगवाने वाले पहुंच रहे हैं। मगर सोमवार को दीनदयाल अस्पताल के काउंटर पर कोविशील्ड वैक्सीन की कमी हो गई। इसके चलते टीका लगवाने आए कुछ लोगों को दोपहर में वापस लौटना पड़ा। इसे लेकर टीकाकरण प्रभारी डॉ. शरद गुप्ता कहते हैं कि रविवार को महाभियान में टीके लगे थे। इसके बाद सोमवार को फिर वैक्सीन एलॉट की गई है। कमी नहीं होने दी जा रही है।

ये मौसम एक दिन की बारिश और फिर तेज धूप के कारण बुखार पैदा करता है। तीन दिन तक इसका असर रहता है। इसमें जो लोग सावधानी नहीं बरत रहे, उन्हें कोविड या प्लेटलेट्स गिरने तक की शिकायत हो रही है। इसमें चिंता करने की जरूरत नहीं है। मगर हां, एहतियाती खुराक जरूर लें और सावधानी जरूर बरतें। ये मौसमी बीमारी है। - डॉ.नीरज त्यागी, सीएमओ
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