जिले के जाटलैंड कहे जाने वाले गोंडा के गांव मजूपुर के किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले चार भाइयों में सबसे छोटे मलखान सिंह का राजनीतिक सफर डीएस कॉलेज से शुरू हुआ। छात्र जीवन में राजनीति करते हुए वे इगलास विधानसभा सीट पर सक्रिय हुए। भाजपा के टिकट पर 1996 का चुनाव जीते और जिले की राजनीति का केंद्र बने। छोटे भाई की हत्या से सेना से सूबेदार पद से सेवानिवृत्त बड़े भाई दलवीर सिंह हिल गए। उन्होंने संकल्प लिया और कानून के दम पर हत्या के आरोपियों को सजा दिलाने के लिए दिन-रात एक किया। आज उन्होंने राहत महसूस की और बुलंदशहर से जब वे घर लौटे तो अपने भाई के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
जब जख्मी सिपाही ने बदले बयान
दलवीर सिंह बताते हैं कि इस घटना के चश्मदीद गवाह के रूप में घायल सिपाही सतवीर सिंह निवासी इटावा के बयान हुए तो वह न्यायालय में पुलिस को दिए बयान पर नहीं टिक सका। उससे जब बातचीत हुई तो वह कमजोर साबित हुआ। उसके बयान बदलने पर लगा कि कहीं मुकदमा कमजोर न हो जाए। मगर न्यायालय में उसके बयानों के चलते उसे पक्षद्रोही करार दिया। इस पर उसने बचाव पक्ष की ओर से बयान दर्ज कराए।
3 दशक में हत्या की 10 एफआईआर, गुड्डू पहली बार दोषी करार
- 5 फरवरी 1989 में पिता की हत्या के बदले में जिले की सबसे चर्चित हस्ती हरस्वरूप भैय्याजी (वरिष्ठ कांग्रेस नेता विवेक बंसल के पिता) की हत्या में नाम आया।
- 2002 में जिला पंचायत अध्यक्ष रहते जलपुरुष राजेंद्र सिंह को थप्पड़ मारने का आरोप, रासुका में पाबंद हुए, कोर्ट से बरी भी किए गए।
- 2006 में अध्यक्षी हारने के बाद पूर्व विधायक मलखान सिंह की हत्या का आरोप लगा, लंबे समय जेल में रहे, अब उसमें दोषी करार किए।
- 2021 में बेटों ने नामचीन कारोबारी की गाड़ी पर हमला किया तो फिर सुर्खियों में आए और खुद गैंगेस्टर में जेल गए, पंचायत चुनाव के बाद रिहाई।
ये हैं आरोपी और उनकी क्राइम हिस्ट्री-
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तेजवीर सिंह गुड्डू सुखरावली हाल निवासी जापन हाउस। क्वार्सी से एचएस नंबर 64 ए, कुल 44 मुकदमे।
पूर्व ब्लाक प्रमुख गोंडा प्रदीप सिंह शहरी मदनगढ़ी गोंडा। गोंडा से एचएस नंबर 18 ए, कुल 29 मुकदमे।
पूर्व प्रधान जितेंद्र उर्फ जीतू चिंता की नगरिया गोंडा, गोंडा से एचएस नंबर 21 ए। कुल 24 मुकदमे।
सोनू गौतम शहरी मदनगढ़ी गोंडा, गोंडा पर एचएस नंबर 48 ए। कुल 22 मुकदमे।
संजीव उर्फ रॉबी कलाई हरदुआगंज, हरदुआगंज से एचएस नंबर 32 ए। कुल 30 मुकदमे।
प्रेम सिंह कुशवाहा सासनी गेट, गोंडा से एचएस नंबर 76 ए। कुल 16 मुकदमे।
प्रदीप उर्फ अन्नू डोरी नगर छावनी, गांधीपार्क से एचएस नंबर 42 ए। कुल 8 मुकदमे।
विशाल गौड़ नौरंगाबाद, गांधीपार्क से एचएस नंबर 38 ए। कुल 25 मुकदमे।
भूपेंद्र गुप्ता गुरुद्वारा रोड सिविल लाइंस कुल 14 मुकदमे।
उपेंद्र उर्फ छोटू प्रीमियर नगर गांधीपार्क, कुल 14 मुकदमे।
अमित गुप्ता उर्फ अमिता मानिक चौक गांधीपार्क, कुल 7 मुकदमे।
सुनील उर्फ दाऊ
सोनू उर्फ सुरेश।
लालू खां,
शरीफ खां
ये लंबे समय से फरार
सुशील पंडित गोंडा।
ये मृत
हनी गौतम, दौरान-ए-विवेचना मृत।
अबोध और अभिषेक, दौरान-ए-ट्रायल मृत।
पुलिस रिकार्ड के अनुसार यह गैंग जिला पुलिस में वर्ष 2015 में गैंगचार्ट संख्या डी-30/15 में पंजीकृत है और इस गैंग का जरायम रिकार्ड भाड़े पर हत्या करने वालों के रूप में दर्ज है। इसमें जो जीवित हैं उनकी पुलिस निगरानी जारी रहती है। साथ में इस गैंग का सरगना सोनू गौतम को, जबकि बाकी सभी को सदस्य दर्शाया गया है।
44 मुकदमों का सफर
वर्ष 1991 में तेजवीर सिंह गुड्डू का आपराधिक सफर शुरू हुआ। सबसे पहले उन पर हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद से अब तक कुल 44 मुकदमे दर्ज हुए, जिनमें 10 हत्या। 4 बार रासुका व छह बार गैंगेस्टर दर्ज हुई। क्वार्सी में 17, सिविल लाइंस में 9, गोंडा में 4, इगलास में 4, लोधा में 1, खैर में 1, मथुरा में 1, हाथरस के हसायन में 3, बुलंदशहर में 2, मैनपुरी में 1 व राजस्थान के अलवर में 1 मुकदमा दर्ज।
अधिकांश मुकदमों में बरी
सिविल लाइंस में पिछले कुछ वर्ष में जमीनी धोखाधड़ी में दर्ज ताजा मुकदमे और मलखान सिंह हत्याकांड के मुकदमे को छोड़कर अधिकांश में वे बरी हो चुके हैं।
गैंगेस्टर में संपत्तियां भी सीज
पहले वर्ष 2011 में और अब 2021-2022 में जिला प्रशासन ने गैंगेस्टर एक्ट के तहत तेजवीर गुड्डू की संपत्तियों को सीज किया है। हालांकि 2011 में सीज हुईं संपत्तियां कोर्ट के आदेश पर मुक्त हो गईं।
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तेजवीर सिंह गुड्डू का राजनीतिक सफर के बीच अपराध और विवाद से पुराना नाता है। तीन दशक के आपराधिक सफर में कुल 44 मुकदमों में हत्या के 10 मुकदमे दर्ज हुए। मगर यह हत्या का पहला मुकदमा है, जिसमें गुड्डू को दोषी करार किया गया। इस दौरान कुल चार ऐसे विवादित घटनाक्रम रहे, जिनके चलते गुड्डू सुर्खियों में रहे और सबसे आखिरी 2021 के घटनाक्रम में गुड्डू को पुलिस ने पहली बार गिरफ्तार कर जेल भेजा।
तेजवीर सिंह गुड्डू के आपराधिक जीवन पर गौर करें तो उनके पिता रामस्नेही की 5 फरवरी 1989 को पान दरीबा स्थित उनके दफ्तर में हत्या की गई। जमीनी व व्यापारिक प्रतिष्पर्धा में की गई इस हत्या के बदले गुड्डू ने अपराध का रास्ता अपनाया। शुरुआत में ही गुड्डू का नाम उस समय जिले की सबसे चर्चित हस्ती हरस्वरूप भैय्याजी (वरिष्ठ कांग्रेस नेता विवेक बंसल के पिता) की हत्या में आया। इसके बाद उन पर मुकदमे लगते चले गए।
इस तरह दो बार रासुका में हुई कार्रवाई
इसी बीच 1996 में राजनीति में भाग्य आजमाने उतरे। इगलास से पहला चुनाव लड़ा, मगर हार गए। 2000 में जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के बाद वर्ष 2002 में उनके सिर पहला विवाद मैग्सेसे पुरस्कार विजेता जल पुरुष राजेंद्र सिंह को जिला पंचायत परिसर में आयोजित कार्यक्रम में खुद अध्यक्षता करते समय थप्पड़ मारने का लगा। बात इतनी सी थी कि राजेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में यह कह दिया था कि जनप्रतिनिधि विकास के नाम पर हमेशा निधि का रोना रोते रहते हैं। उस घटना में सरेंडर करने के बाद उन पर रासुका के तहत कार्रवाई तक हुई। हालांकि कुछ साल पहले जलपुरुष द्वारा न्यायालय में गुड्डू को न पहचानने संबंधी बयान पर बरी कर दिया गया। इसके बाद पूर्व विधायक मलखान सिंह हत्याकांड में भी गुड्डू पर रासुका में कार्रवाई हुई।
जेल से छूटे तो चुनाव में जिला बदर की कार्रवाई हुई
वर्ष 2021 में उनके बेटों पर शहर के एक नामचीन निर्यातक पर हमले का आरोप लगा। इस दौरान दोनों बेटे जेल गए और पुलिस ने जमीनी मुकदमों के आधार पर सभी पर गैंगस्टर लगाया और उसमें गुड्डू को दीवानी से गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। हालांकि कुछ माह जेल रहने के बाद गुड्डू विधानसभा चुनाव से ऐन पहले रिहा हुए। इस चुनाव में गुड्डू बसपा से अपनी पुत्रवधू चारू केन के लिए खैर सीट पर विधानसभा चुनाव का टिकट लेकर आए। मगर जिला प्रशासन ने गुड्डू व दोनों बेटों को जिला बदर कर दिया। तब से गुड्डू की जिले में सक्रियता कम दिख रही थी।
जिले सियासी और आपराधिक दुनिया में चर्चित नाम तेजवीर सिंह गुड्डू एक बार फिर सुर्खियों में हैं। बीते ढाई दशक से राजनीति में सक्रिय तेजवीर सिंह ने पांच पार्टियां बदलीं, लेकिन वह सिर्फ एक बार ही जिला पंचायत अध्यक्ष बन पाए। बाकी चुनावों में उनको सफलता नहीं मिली। इन पांच पार्टियों में सपा, रालोद, भाजपा, प्रसप और बसपा हैं।
तेजवीर के राजनीतिक सफर पर गौर करें तो उन्होंने वर्ष 1996 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा और इगलास विधानसभा सीट से सपा (चंद्रशेखर के नेतृत्व वाली पार्टी) के उम्मीदवार बने। पहला ही चुनाव हार गए। मूल रूप से क्वार्सी क्षेत्र के सुखरावली के रहने वाले तेजवीर सिंह का कार्यक्षेत्र बेशक अलीगढ़ शहर रहा, लेकिन जाट बाहुल्य इगलास में ससुराल होने और खुद जाट होने के नाते वह इगलास से राजनीति में सक्रिय हुए। इसके बाद वर्ष 2000 जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव रालोद से लड़े, इनके सामने चौ.प्रेम सिंह हार गये थे।
वर्ष 2004 में लोकसभा चुनाव उन्होंने रालोद से टिकट मांगा, लेकिन घोषणा के बाद टिकट काट दिया गया। इससे नाराज तेजवीर समर्थकों ने रालोद मुखिया चौ.अजित सिंह के दिल्ली स्थित आवास पर जमकर हंगामा किया। जिससे अजित सिंह खासे नाराज हुए और उन्होंने तेजवीर सिंह से दूरी बना ली। इसी चुनाव में जब कांग्रेस नेता चौ. बिजेंद्र सिंह चुनाव जीत कर संसद पहुंचे तो इगलास विधानसभा सीट खाली हो गई। उस वक्त तेजवीर सिंह गुड्डू ने अपनी पहली पत्नी नीरा चौधरी को भाजपा के टिकट पर इगलास का उपचुनाव लड़वाया था, हालांकि वह हार गई थीं। रालोद से नाराजगी के कारण तेजवीर सिंह ने भाजपा का दामन थामा था, लेकिन बात नहीं बन पाई। एक साल बाद वर्ष 2005 में जिला पंचायत अध्यक्ष पद आरक्षित हुआ तो उन्होंने अपने ही घर परिवार की करीबी विश्वासनीय चंपा देवी को अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ाया। मगर हार गए।
इसके बाद पूर्व विधायक मलखान सिंह हत्याकांड में जेल चले जाने के कारण तेजवीर सिंह वर्ष 2010 में जिला पंचायत के चुनावों में वे सक्रिय नहीं हो सके। वर्ष 2015 में घर के पांच सदस्यों को उन्होंने जिला पंचायत का चुनाव लड़वाया। जिसमें वह खुद, उनकी दूसरी पत्नी शिखा सिंह, दोनों बेटे दीपक व कार्तिक और दीपक की पत्नी चुनाव लड़ी। जिसमें दीपक और शिखा जीते, बाकी तीन सदस्य हार गए। इसी चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए पहले दीपक सपा से उम्मीदवार घोषित हुआ, लेकिन बाद में उसका नाम कट गया। इसके बाद वर्ष 2019 में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के टिकट पर दीपक ने चुनाव लड़ा और हार गया। 2020 में तैयारियों के बीच जेल जाने के चलते पंचायत चुनाव नहीं लड़ सके। 2022 में खैर से बसपा के बैनरतले पुत्रवधु को चुनाव लड़ाया। मगर हार गए।
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तेजवीर सिंह गुड्डू को दोषी करार दिए जाने की खबर पर कहीं खुशी कहीं गम का माहौल है। एक तरफ पूर्व विधायक के परिजनों व समर्थकों में खुशी की लहर है। वहीं गुड्डू समर्थकों में गम का माहौल है। हर तरफ तरह तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। बुलंदशहर कोर्ट के फैसले के बाद सियासी लोग भी अपडेट लेते रहे।
गुड्डू के अलावा ये भी चर्चित जरायम नाम
इस हत्याकांड में गुड्डू बेशक मुख्य किरदार में हैं। मगर इसमें कुछ और भी जरायम नाम हैं, जो जिले में बेहद चर्चित हैं। जिनमें खुद गुड्डू का साला प्रदीप सिंह पूर्व ब्लाक प्रमुख है। वहीं दूसरा सबसे बड़ा नाम सोनू गौतम का है। जो पिछले दिनों आगरा के एक चर्चित हत्याकांड में दोषमुक्त हुआ। इसके अलावा एक नाम विशाल गौड़ का है। इसी तरह एक नाम संजीव उर्फ रॉबी का है, जो पहले से डीएस कॉलेज के संजीव चौधरी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहा है।
इस हत्या के बाद हुई थी सोनू के भाई की हत्या
यह जरायम चर्चाओं का विषय है, मगर इसका कोई मुकदमा आज तक दर्ज नहीं हुआ। मलखान सिंह की हत्या के कुछ समय बाद सोनू गौतम के भाई हनी गौतम की हत्या आगरा के खंदौली क्षेत्र में हुई। उस समय जरायम दुनिया में इसे पूर्व विधायक की हत्या के बदले के रूप में देखा गया। मगर उसका मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। पुलिस विवेचना में हनी का नाम आया था, मगर हत्या होने के कारण उसका नाम अलग किया गया।
परिवार को आज तक मिली हुई है सुरक्षा
इस हत्याकांड के बाद से परिवार को वर्तमान में भी सुरक्षा मिली हुई है। उनके घर पर हर समय पुलिस का पहरा होता है, जबकि न्यायालय के कामकाज से परिजनों के जाने पर सुरक्षा मिलती है। वहीं, वादी बड़े भाई दलवीर सिंह के आने जाने पर सुरक्षा मिलती है। एसएसपी कलानिधि नैथानी बताते हैं कि मामले में गवाही के लिए भी सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किए जाते रहे हैं।