मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने केंद्र सरकार पर यहां जमकर निशाना साधा। कहा कि दिल्ली में किसानों को बर्बाद करने की साजिश हो रही है। अगर कृषि कानून लागू हो जाते तो किसानों की जमीनें चली जातीं। सरकार की निगाह हमारे पेट, जमीन और रोजगार पर है। कुतिया की मौत पर भी संवेदना संदेश भेजने वाली सरकार 700 किसानों की मौत पर भी चुप्पी साधे रही। मलिक गोंडा के भ्यामल खेड़ा में किसान पंचायत को संबोधित कर रहे थे।
सत्यपाल मलिक ने किसानों से आह्वान किया कि दोबारा लड़ाई लड़नी पड़ेगी। मुझसे जहां कहोगे, वहां आकर बैठ जाऊंगा। इस बार लड़ाई आर-पार की होगी। अगर चूक गए तो सारी जिंदगी मांगते रहोगे। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों हुए किसान आंदोलन के दौरान मैं अपना इस्तीफा जेब में रखकर प्रधानमंत्री से मिलने गया। मैंने कहा कि साहब 11 महीने हो गए है आपका कोई आदमी बात नहीं कर रहा है। आप इनको जानते नहीं हो, ये तब जाएंगे जब आप चले जाओगे। लेकिन तब प्रधानमंत्री ने मेरी बात पर ध्यान नहीं दिया। मलिक ने अडानी व अंबानी को भी आड़े हाथ लिया।
बाबा अमानी, चरन सिंह, छोटू राम का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि एमएसपी की लड़ाई चौधरी छोटू राम छोड़कर गए थे। उन्होंने वायसराय का हुक्म नहीं माना था। आज किसानों की फसल का दाम वायसराय तय कर रहे हैं। हर साल हिंदुस्तान का किसान गरीब हो रहा है। किसानों को इस तरह से बर्बाद किया जा रहा है कि उन्हें पता भी नहीं चल रहा है।
बिहार, जम्मू-कश्मीर, गोवा के राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल के संबंध में उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार का विरोध किया तो हटा दिया। गोवा में हो रहे भ्रष्टाचार की जानकारी प्रधानमंत्री को दी, लेकिन उन्होंने मेरा नहीं, भ्रष्टाचार का साथ दिया।
सत्यपाल मलिक ने किसानों से शिक्षा, खासकर बेटियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की बात कही। किसान पंचायत की अध्यक्षता मास्टर केवल सिंह व संचालन डॉ. धर्मवीर सिंह, संतोष चौधरी ने किया। पंचायत में पूर्व सांसद बिजेंद्र सिंह, चौ. रामवीर सिंह, बीरबल सिंह, वीरेंद्र सिंह, किसान नेता जगराम सिंह, रामबाबू कटेलिया, जितेंद्र सिंह आदि ने भी अपने विचार रखे।