सीए के बेटे ने आत्महत्या क्यों की..? यह अनुत्तरित सवाल है। जिस तरह के तथ्य और परिवार से मिली जानकारियां सामने आ रही हैं। उससे अंदाजा यही लगाया जा रहा है कि खुद किशोर हाईस्कूल के अपने 95 फीसद नंबरों से संतुष्ट नहीं था। उसे 97 फीसद से अधिक नंबर आने की उम्मीद थी। हालांकि कम नंबरों को लेकर न तो परिवार से कोई टोकाटाकी थी और न किसी और ने सवाल जवाब किया। फिर सुसाइड नोट के अनुसार उसने अपने माता-पिता को किस बात से नीचा दिखाने का जिक्र किया ये स्पष्ट नहीं है ? इन सवालों के जवाब पुलिस तलाश रही है। माना जा रहा है कि कम नंबर ही खुद की व परिवार की असंतुष्टि का कारण होंगे।
इंस्पेक्टर महुआ खेड़ा विजय सिंह के अनुसार परिवार से बातचीत व मौके पर हुई जांच से जानकारी में आया कि किशोर पढ़ने में होनहार था। उसके दो ही शौक अब तक सामने आए हैं, एक तो वह ज्यादातर समय पढऩे-लिखने में बिताता था। खाली समय में ऑनलाइन गेम खेलने का शौकीन था। फ्लैट से बाहर उसको बहुत ही कम लोग आते जाते देखते थे। इसी वर्ष उसने दसवीं में 95 फीसदी अंक लाए थे। वह 97 फीसद से अधिक अंक लाने की उम्मीद लगाए था। मगर उससे इस विषय पर कोई सवाल जवाब नहीं हुआ। फिर उसने आत्महत्या क्यों की। ये अभी परिवार भी नहीं समझ पा रहा। क्योंकि पढ़ाई में दबाव जैसी कोई बात नहीं थी।
इधर, परिवार से जानकारी मिली है कि उसके माता-पिता शनिवार को मसूरी घूमने गए थे। उन्होंने किशोर से भी साथ चलने को कहा था। मगर उसने अपनी कोचिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी के चलते जाने से इंकार कर दिया। सोमवार को रात उसकी अपने माता-पिता से बात हुई। इसके बाद लोगों ने रात 11:40 बजे उसके फ्लैट की लाइट जलने पर ध्यान दिया। इसके बाद पिता के आने पर उसके आत्महत्या का शोर मचा। उसके बाद से उसके माता-पिता बदहवास हैं।
खुद बेटे की थी इच्छा, इसलिए नेत्र दान
देहदान कर्तव्य संस्था के पदाधिकारी डा.जयंत शर्मा व भुवनेश आधुनिक ने बताया कि उनके परिवार की ओर से बच्चे की नेत्रदान की खबर पर वे पोस्टमार्टम केंद्र पहुंचे। जहां परिवार ने बताया कि उनका बेटा होनहार था और वह अक्सर घर में कहता था कि वह अपनी आंखें दान करेगा। बेटे की इच्छा के चलते ही यह फैसला लिया है। इस पर मेडिकल कॉलेज की टीम बुलाकर नेत्र दान की प्रक्रिया कराई गई और परिवार को प्रमाण पत्र सौंपा गया। इधर, छोटे बेटे को स्कूल प्रबंधन के जरिये पुणे से वापस लाने की तैयारी हो रही थी। इसलिए देर शाम तक अंतिम संस्कार नहीं हो सका था।
कहीं गेम में हार जीत पर तो नहीं गंवाई जान
पुलिस के अनुसार खुद परिवार, आस पड़ोस के लोग जब उसके कमरे में पहुंचे और पुलिस भी आई तो उसके कंप्यूटर में ऑनलाइन गेम चलता मिला। सिस्टम में ईयर फोन भी लगा हुआ था और गेम की आवाजें ईयरफोन में आ रही थीं। ऐसे में अंदेशा यह भी है कि कहीं उसने गेम में हार जीत को लेकर जान तो नहीं दी। मगर सच जांच के बाद सामने आएगा।