आस्था का महापर्व छठ शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। पूर्वांचलियों का सबसे बड़ा और पवित्र पर्व हर जगह धूमधाम से मनाया जाता है। चार दिवसीय इस पर्व की शुरुआत नहाय खाय के साथ हुई। देश के हर कोने में जहां-जहां भी बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग हैं, वहां छठ पर्व मनाया जा रहा है। पहले दिन महिलाओं ने पूजा -अर्चना की और प्रसाद ग्रहण कर पर्व की शुरुआत की। अब पर्व के दूसरे दिन शनिवार को खरना मनाया जाएगा।
छठ महापर्व में ऐसे करते हैं पूजा
नहाय-खाय के साथ शुरू हुए छठ के महापर्व में साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखते हुए यह पूजा की जाती है। नहाय-खाय के साथ ही घर में खाना बिना नमक वाला बनता है, इसमें सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है। स्नान के बाद छठ का प्रसाद तैयार किया जाता है। प्रसाद में अरवा चावल, चने की दाल और कद्दू की सब्जी और कद्दू-भात बनाई जाती है।
पहले व्रती प्रसाद ग्रहण करता है और उसके बाद पूरे परिवार और आसपास के लोगों को प्रसाद दिया जाता है। छठ पूजा एक ऐसा पर्व है, जिसे पूरे परिवार को एकसाथ मिलकर मनाया जाता है। व्रत के दौरान साफ-सफाई, पवित्रता और पर्यावरण का ख्याल रखना होता है।
इधर-उधर छूना मना है। इसमें कोरोना संक्रमण से भी अधिक सख्त नियम है। किसी को छुए तो हाथ धोना अनिवार्य है। अगर कोई शौचालय जाता है तो उसे नहाना होता है, तभी वह इस पर्व में शामिल होता है। इस पर्व के बहुत सख्त नियम हैं। व्रती महिलाओं की आस्था और उनका छठी मईया के प्रति विश्वास ही है कि चार दिनों तक उपवास रखते हुए पर्व को पूरा करती हैं।
आज होगा खरना
महापर्व के दूसरे दिन आज खरना है। व्रती महिला-पुरुष खाने के बाद उपवास पर रहेंगे। शाम को खरना मनाया जाएगा। जिसके लिए खास तरह की खीर बनाई जाती है, जिसमें चीनी की जगह गुड़ डाला जाता है। कई जगह गन्ने के रस से खीर बनाई जाती है। प्रसाद में खीर के अलावा केला चढ़ाया जाता है।
सबसे पहले व्रती महिलाएं इस प्रसाद का सेवन करती हैं। नियम यह है कि व्रती महिलाएं जब खरना का प्रसाद ग्रहण करना शुरू करती हैं और इस दौरान उनके कानों में किसी तरह की यदि आवाज पहुंच जाए तो वह प्रसाद ग्रहण करना वहीं रोक देती हैं और उसके बाद प्रसाद को नहीं खाती हैं। खरना की शाम के बाद व्रती निर्जला रहकर पहले अर्घ्य और दूसरे अर्घ्य के बाद ही फिर अन्न ग्रहण करती हैं।
तीसरे दिन शाम का अर्घ्य
महापर्व के तीसरे दिन रविवार को शाम को अर्घ्य दिया जाएगा। इससे पहले व्रती महिलाएं घर में इसकी तैयारी करती हैं। परिवार के सदस्य पूरे नियम के साथ प्रसाद बनाने में लग जाते हैं। प्रसाद के लिए मुख्य रूप से ठेंकुआ बनाया जाता है। ठेंकुआ बनाने के लिए व्रती महिलाएं खुद से गेहूं साफ करती हैं, धोती हैं और उसे पिसाया जाता है।
पर्व में आमतौर पर मिट्टी के चूल्हे पर ही पकवान बनाया जाता है, लेकिन आजकल गैस चूल्हे पर भी बनता है। हालांकि ऐसे चूल्हे पर प्रसाद बनता है, जो सिर्फ पर्व में इस्तेमाल हो। जब पकवान तैयार हो जाता है तो उसे सूप और डाले में रखा जाता है, जिसमें पकवान के अलावा कई प्रकार के फल होते हैं। सेब, नारंगी, गन्ना, पानी फल, नींबू आदि प्रसाद में चढ़ाया जाता है। इसके बाद अर्घ्य के लिए बने घाट पर व्रती सहित पूरा परिवार पहुंचता है और डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा करते हैं।
चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य
पर्व के चौथे दिन सोमवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। घाट पर महिला, बच्चे, बूढ़े, जवान सभी एक साथ पहुंचते हैं। जहां पर शाम को अर्घ्य हुआ था, उसी घाट पर सुबह का अर्घ्य भी होता है। अर्घ्य में लोग दूध और जल सूर्य देवता को अर्पित करते हैं। सुबह के अर्घ्य के बाद व्रती महिलाएं अपना व्रत तोड़ती हैं, जिसमें पहले वो पानी में घोलकर चीनी और नींबू का शर्बत लेती हैं और बाद में अन्न ग्रहण करती हैं। इसके साथ ही यह व्रत और महापर्व छठ की पूजा संपन्न हो जाती है।
बोले व्रती ...
छठ महापर्व की शुरुआत हो गई है। कोरोना के बाद पहली बार धूमधाम से यह पर्व मनाया जा रहा है। अगले तीन दिन तक धार्मिक आस्था के साथ ही उत्सवी माहौल बना रहेगा।
- गायत्री देवी, पीडब्ल्यूडी कॉलोनी, अनूपशहर रोड
छठ मैय्या की पूजा और व्रत रखने से हर मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस बार भी उल्लास के साथ व्रत की तैयारी की गई है। सूर्य देवता को जल अर्पित करने के बाद व्रत का समापन होगा।
-रघुवंशी प्रसाद कुशवाह, क्वार्सी, रामघाट रोड