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चंद्रचूड़ के पिता पूर्व विधायक कैप्टन बल्देव सिंह का निधन

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जलालपुर के जमींदार परिवार से ताल्लुक रखने वाले शहर के पूर्व विधायक कैप्टन बल्देव सिंह का रविवार को मुंबई में देहांत हो गया। 81 वर्षीय बल्देव सिंह लीलावती अस्पताल में भर्ती थे। कैप्टन के तीन पुत्रों में सबसे बड़े चंद्रचूड़ फिल्म अभिनेता हैं और तीनों बेटे मुंबई में रहते हैं। उनके निधन की खबर पर जिले के सियासी जगत व परिचितों में शोक की लहर है।
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जलालपुर के जमींदार हरेंद्रपाल सिंह उर्फ हरीबाबू के तीन बेटों में सबसे बड़े कैप्टन बल्देव सिंह की शिक्षा-दीक्षा दून स्कूल में हुई। वह वहां पर पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी के साथ पढ़े थे। राजीव गांधी उनके अच्छे मित्रों में से थे। 1984 में सेना से वीआरएस लेने के बाद वे कांग्रेस में शामिल हुए और शहर सीट से कांग्रेस ने उन्हें चुनाव मैदान में उतारा। उन्होंने ख्वाजा हलीम व भाजपा के इंद्रपाल सिंह को हराकर जीत दर्ज की। इस बीच उनकी पूर्व प्रधानमंत्री ठा. वीपी सिंह से नजदीकी हो गई और 1988 में वीपी सिंह के साथ वह कांग्रेस छोड़कर जनता दल में शामिल हो गए।
1989 में उन्होंने बरौली सीट से विधायकी का चुनाव लड़ा, मगर हार गए। 1991 में जनता दल के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन 7-8 हजार वोटों से वह भाजपा की शीला गौतम से हार गए। इसके बाद एक चुनाव उन्होंने सपा के बैनरतले लड़ा। बाद में वे चौ. अजित सिंह के साथ चले गए और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भी बने। 1991 के चुनाव में हार के बाद उनकी राजनीति से दूरी होती चली गई। बाद में उन्होंने गुरुग्राम में आवास बनाकर वहां रहना शुरू कर दिया। वर्तमान में जलालपुर में उनके एक भाई गंगा सिंह रहते हैं, जबकि एक भाई का पूर्व में देहांत हो चुका है। कैप्टन बल्देव सिंह के ससुर आरएन सिंह देव उड़ीसा (अब ओडिशा) के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
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तीन वर्ष पहले अलीगढ़ आए थे कैप्टन बल्देव
उनके करीबी जानकारों में शामिल रिश्तेदार बार के पूर्व अध्यक्ष ठा. पीके सिंह, अधिवक्ता संदीप सिंह व योगेश शर्मा एडवोकेट बताते हैं कि कैप्टन बल्देव तीन वर्ष पूर्व अलीगढ़ आए थे। इसके बाद उनका यहां आना नहीं हुआ। हां, वे अलीगढ़ के अपने पुराने परिचितों के संपर्क में फोन के जरिये रहते थे। जब से चंद्रचूड़ सहित उनके तीनों बेटे मुंबई में बसे और फिल्मी दुनिया में जुड़ गए, तब से अलीगढ़ के बजाय उनका मुंबई व गुरुग्राम में ज्यादा समय बीतता था। पिछले दिनों बीमारी पर उन्हें दिल्ली में भर्ती कराया गया था। बाद में बेटे अपने साथ मुंबई ले गए थे।
निधन पर जताया गया शोक
उनके निधन की खबर पर सोमवार को कांग्रेस जिलाध्यक्ष ठा. संतोष सिंह ने शोक व्यक्त किया। दीवानी में वरिष्ठ अधिवक्ता गवेंद्र सिंह, अमर सिंह, मनोज शर्मा, शिवकुमार, नरेंद्र सिंह, जितेंद्र सिंह आदि ने भी बैठक कर शोक व्यक्त किया।
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