आरोपी महिला के ननद परी (7) एक माह पहले मौत हो गई थी। वह बीमार थी और मरने से पहले मरियम के पास थी। देवर की हत्या में मरियम के पकड़े जाने के बाद परिजन उसकी भी हत्या किए जाने की आशंका जता रहे हैं।
गांव के ही विशंभर वाल्मीकी के पत्नी कमला के अलावा दो बेटे और तीन बेटियां थीं। सबसे बड़ा बेटा शुभम (19) है, इससे छोटी बेटी किरन (14), अन्नू (10), परी (7) और सबसे बादल (5) था। विशंभर ने बताया कि गत वर्ष देवोत्थान एकादशी के दिन उन्होंने शुभम की शादी कासगंज जनपद के अमापुर क्षेत्र निवासी मरियम के साथ की थी। शादी के कुछ दिन बाद से ही पति-पत्नी के बीच अनबन रहने लगी। परिजन मरियम के व्यवहार और करतूतों का खुलासा कर रहे हैं। मरियम की सास कमला देवी ने बताया कि एक माह पहले बीमार चल रही सात वर्षीय बेटी परी सुबह अचानक मृत मिली, वह मरियम के पास थी। पहले शक हुआ था, लेकिन बेटी के बीमार होने का कारण मान लिया कि बीमारी से मौत हुई और कुछ नहीं कहा। लेकिन अब लग रहा है कि उसकी भी हत्या की गई।
बेड में आग लगाई और ननद का तोड़ दिया था हाथ
परिजनों का आरोप है कि एक पड़ोसी से मरियम की अनबन हो गई जिसके बाद मरियम ने कमरे में जाकर बेड के गद्दे में आग लगा दी। इसका आरोप पड़ोसी पर जड़ दिया, बाद में समझा-बुझाकर मामला शांत किया। लगभग दो माह पहले मरियम ने बाइक पर बैठी ननद किरन को धक्का देकर गिरा दिया। इससे उसका दाया हाथ टूट गया था।
ससुर की शराब में घोल दी थी क्रोसिन टेबलेट
सास कमला देवी ने बताया कि उसके पति विशंभर अक्सर शराब पीते हैं और गलती होने पर गाली गलौज भी कर देते हैं। इसी से चिड़कर मरियम ने शराब में बुखार उतारने वाली क्रोसिन की कई गोलियां घोल दी थीं, पता चलने पर विशंभर ने उस शराब को पिया नहीं था।
भाई के शव को तलाशने वाली बहन किरन घटनास्थल पर बिलख-बिलख कर रो रही थी। शव को निकालने से लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजने तक उसके अलावा परिवार का कोई बड़ा सदस्य मौके मौजूद नहीं था। चंद घंटों पहले भाई के साथ खेल रही थी बहन ने बताया कि भाभी ने मोबाइल के बहाने भाई बादल को बुलाया था जिसके कुछ देर बाद उन्होंने बोरा उठवाने के लिए आवाज लगाई। पूछने पर बताया कि बोरे में कूड़ा भरा है। किरन ने ही बोरा उठवा कर भाभी के सिर पर रखवाया, तब तक उसे भनक तक नहीं थी कि बोरे में कूड़ा नहीं बल्कि छोटे भाई का शव है।
बदहवास हुई मां, कभी कुएं पर तो कभी घर में लगी तलाश
मजदूरी पर जाने के दौरान हंसते खेलते बेटे को छोड़कर गई मां कमला देवी को जब बेटे की मौत की जानकारी हुई तो वह पति और बेटे के साथ दोपहर डेढ़ बजे करीब गांव पहुंच गई, लेकिन तब तक पुलिस शव को भेज चुकी थी। बेटे की मौत का यकीन कर पाना उसके लिए आसान नहीं था। इसलिए कभी कुएं की तरफ तो कभी घर के कमरे में झांक कर बेटे को पुकारती रही। मां का चीत्कार सुनकर सभी भी हृदय द्रवित हो रहा था। मां के साथ बेटियां भी अपने छोटे भाई को याद कर रोती रहीं। कई बार कमला देवी बेसुध हुई।