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Aligarh News: बहुचर्चित कारोबारी फहद हत्याकांड के आरोपी आशुतोष-अतीउल्ला बरी

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लाल डिग्गी रोड पर नौ वर्ष पूर्व सरेशाम हॉर्न बजाने से जुड़े विवाद में कारोबारी फहद के बहुचर्चित हत्याकांड में अदालत का फैसला आ गया। हत्याकांड में आरोपी बनाए गए द किलिंग मशीन ए गैंग के सरगना पर आरोप साबित नहीं हो सके। अपर सत्र न्यायालय ने घटना की इकलौती चश्मदीद गवाह कारोबारी की पत्नी के बयानों में विरोधाभास को ध्यान में रखते हुए मुख्य आरोपी कुख्यात अपराधी आशुतोष मिश्रा व अतीउल्ला को बरी कर दिया है। बता दें कि इस हत्याकांड में कुख्यात अपराधी मुनीर मेहताब भी आरोपी था, पिछले दिनों मुनीर की बीमारी के चलते मौत हो गई थी।
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घटना 20 अक्तूबर 2014 की शाम करीब साढ़े आठ बजे की है। नाहिद लॉज अमीर निशा, सिविल लाइंस निवासी रफत अली ने मुकदमा दर्ज कराया था कि उनका 34 वर्षीय बेटा ख्वाजा फहद अली (नोएडा में हार्डवेयर कारोबारी) अपनी पत्नी रुमाना शेरवानी उर्फ तोशिबा व तीन वर्ष तीन माह के बेटे को बाइक से अपनी ससुराल दोदपुर से लौट रहा था। फहद जैसे ही अमीर निशा के पास पहुंचे तो वहां जाम लगा था।



पीछे से बाइक पर तीन युवक आए और हॉर्न बजाने लगे। इस पर अन्य राहगीरों व फहद ने उन्हें टोका कि हॉर्न क्यों बजा रहे हो, जाम लगा है। इस पर उनसे कुछ विवाद हुआ। इसके बाद फहद वहां से कुछ आगे जमजम होटल के पास दूध व अंडा लेने के लिए रुके। जैसे ही फहद की पत्नी दुकान के अंदर गई, तभी पीछे से बाइक पर आए उन्हीं युवकों में से एक ने फहद को गोली मार दी, जिससे फहद की मौत हो गई। पत्नी ने दुकान के शीशे से पूरा वाकया देखा।
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इस मामले में पुलिस ने महिला के बताए अनुसार, आरोपियों के स्कैच बनवाए। बाद में पुलिस ने आरोपियों की पहचान एएमयू के पूर्व लॉ छात्र आशुतोष मिश्रा निवासी सिविल लाइंस, फैजाबाद, मुनीर मेहताब निवासी बिजनौर, अतीउल्ला निवासी बलदारी टोला पश्चिमी चंपारन बिहार के रूप में की। करीब एक माह के प्रयास के बाद आशुतोष को गिरफ्तार किया गया, जिसकी शिनाख्त कारोबारी की पत्नी ने की थी। अतीउल्ला और मुनीर की 2016 में गिरफ्तारी हुई। मुकदमे में चार्जशीट के आधार पर सत्र परीक्षण शुरू हुआ।




न्यायालय में साक्ष्यों, पुलिस कहानी व गवाही के आधार पर आशुतोष मिश्रा व अतीउल्ला पर आरोप तय नहीं हो सके और दोनों को एडीजे-विशेष एससी एसटी की अदालत से बरी कर दिया गया। एडीजीसी चमन प्रकाश शर्मा ने इसकी पुष्टि करते हुए अपील की बात कही है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता नीरज चौहान ने भी दोनों के बरी किए जाने की पुष्टि करते हुए बताया कि न्यायालय ने उनकी दलीलों के आधार पर मुकदमे से बरी किया है।






गवाही में ये आया झोल

इस मुकदमे में पहले गवाह के रूप में वादी मृतक के पिता, दूसरे गवाह के रूप में दुकानदार सोहेल, तीसरी गवाह पत्नी के अलावा पुलिस के पांच गवाह रहे, जिनमें से पिता ने यह बयान दिया कि बहू ने फोन पर सबसे पहले बेटे के एक्सीडेंट की सूचना दी। फिर सोहेल ने कहा, दीपावली के समय यह घटना हुई थी। मुझे लगा कि बाहर पटाखा चला है। मैंने किसी को गोली मारते नहीं देखा। जब फहद की पत्नी बाहर दौड़ कर पहुंची और शोर मचाया तो मैं उसके पीछे गया। पत्नी ने बयान दिया कि हॉर्न बजाने का विवाद अमीर निशा पर हुआ था, वहां से हम जमजम होटल के पास आ गए। इस पर बचाव पक्ष ने तर्क रखे कि बाइक सवार हमलावरों ने इनका पीछा नहीं किया। फिर वे मौके पर पीछा कर कैसे आ गए। अगर उन्हें गोली मारनी थी तो विवाद के स्थान पर ही क्यों नहीं मारा। हॉर्न बजाने का विरोध अन्य लोगों ने भी किया था, उन्होंने अन्य लोगों को क्यों गोली नहीं मारी। हमलावरों की फहद से पहले से कोई पहचान नहीं थी। पत्नी ने एक्सीडेंट की सूचना क्यों दी। शीशे में से पत्नी ने देखा तो दुकानदार ने क्यों नहीं देखा। सिर्फ एक साक्षी और कोई स्वतंत्र साक्षी न होने को आधार बनाया गया। दो अन्य स्वतंत्र साक्षी खुद की गवाही से मुकर गए। अधिवक्ता नीरज चौहान के अनुसार, इन आधारों पर मुकदमे से बरी किया गया।







तब से जेल में है आशुतोष मिश्रा

इस घटना में दो मुख्य आरोपी में से एक मुनीर की मौत हो चुकी है, जबकि दूसरा आशुतोष इस घटना में हुई गिरफ्तारी के बाद से जेल में है। उस पर मुनीर के साथ अन्य कई मुकदमे लंबित हैं। वर्तमान में वह तिहाड़ जेल में बंद है। द किलिंग मशीन ए गैंग के नाम से आशुतोष-मुनीर का गैंग पुलिस में दर्ज है।
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