प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद एएमयू कुलपति ले. जनरल (सेवानिवृत्त) जमीरउद्दीन शाह ने एक बयान देकर खलबली मचा दी है। एएमयू कुलपति ने कहा कि प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान साफ-साफ बता दिया कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अल्पसंख्यक स्वरूप में दखल मत दीजिएगा।
इससे मुसलमानों का भावनात्मक संबंध जुड़ा हुआ है। यदि इसमें दखलंदाजी हुई या अल्पसंख्यक स्वरूप छीना गया तो हिंदुस्तान के मुसलमानों को बहुत सदमा लगेगा। इससे आपको एवं हिंदुस्तान को बहुत नुकसान होगा।
कुलपति जनरल शाह ने यह टिप्पणी सोमवार को सर सैयद एजूकेशनल सोसाइटी एवं सर सैयद अवेयरनेस फोरम द्वारा एएमयू में ‘धार्मिक सहिष्णुता एवं भारत की साझा संस्कृति’ पर आयोजित सिम्पोजियम में अपने भाषण के दौरान की।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पूछा था कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है तो मैंने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है, लेकिन इस मामले में सरकार ने अपना स्टैंड कैसे तब्दील कर दिया। 1980 में जनता पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र में एएमयू के अल्पसंख्यक स्वरूप को स्वीकार किया गया था और भाजपा जनता पार्टी उसमें शामिल थी।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उस पर हस्ताक्षर किए थे। कुलपति ने कहा कि प्रधानमंत्री उनकी बात समझ गए हैं और अब सब कुछ खुदा के हाथ में है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी अल्पसंख्यक स्वरूप है और बरकरार रहेगा।
हालांकि बाद में उन्होंने को स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री सबका साथ सबका विकास का नारा दे रहे हैं और सबको साथ लेकर चलने की बात कर रहे हैं। ऐेसे में मुसलमानों को दूर करके चलेंगे तो देश का नुकसान होगा, क्योंकि मुसलमानों को नुकसान देश का नुकसान है।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद अलीगढ़ में कुछ लोग यह आरोप लगा रहे थे कि कुलपति की पीएम से अल्पसंख्यक स्वरूप एवं केंद्र को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई।