महानगर के जीटी रोड स्थित रामलीला मैदान के सामने सिद्धपीठ के रूप में महादेव का अचलेश्वर धाम मंदिर बना हुआ है। भगवान शिव यहां शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। मंदिर के निकट विशाल सरोवर भी है। अचलेश्वर धाम मंदिर शहर के लोगों के लिए आस्था का प्रतीक है।
शहर के मध्य में होने के कारण यहां भक्तों का सैलाब उमड़ता है। मंदिर के पुजारी राजू गोस्वामी बताते हैं कि मराठों ने करीब 500 साल पहले इस मंदिर को भव्य रूप दिया। द्वापर युग में अज्ञातवास के समय नकुल और सहदेव ने मंदिर के निकट सरोवर में स्नान किया था। धीरे- धीरे मंदिर आस्था का केंद्र बनता चला गया। भक्तों की संख्या यहां लगातार अनवरत बढ़ती चली गई। प्रत्येक सोमवार को यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है। महाशिवरात्रि एवं सावन में हजारों श्रद्धालु शिवलिंग पर जलाभिषेक के साथ बेलपत्र, दूब, धतूरा आदि अर्पित करते हैं।
मंदिरों का नगर
अचलेश्वर धाम बाबा के नाम से ही अचलताल भी प्रसिद्ध है। यहां भगवान श्री कृष्ण, बलदाऊ, दुर्गा मैया, शिव पार्वती, नौ देवी आदि के मंदिर भी हैं। अचलताल की परिक्रमा बड़ी संख्या में भक्त लगाते हैं। मान्यता है कि परिक्रमा लगाने से भक्तों की मनोकामना जरूर पूर्ण होती है।
भक्तों के बोल
अचलेश्वर धाम बाबा के दर्शन करने मात्र से ही जीवन धन्य हो जाता है। भोलेनाथ की भक्तों पर बड़ी कृपा है। मैं प्रतिदिन अचलेश्वर धाम के दर्शन करने आता हूं। - संदीप राजपूत, देवी नगला
शहर के मध्य में भगवान भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। शिव भक्तों पर बड़ी कृपा है। चारों तरफ मंदिर होने से यह स्थान तीर्थ स्थल के रूप में दिखाई देता है। इससे मन और पवित्र हो जाता है। - देवेंद्र वर्मा, हरिओम नगर