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तीसरी लहर के बाद पोस्ट कोविड समस्याएं नगण्य
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पहली एवं दूसरी लहर के बाद कई तरह की समस्याएं आई थी सामने
अमर उजाला ब्यूरो
अलीगढ़। पहली एवं दूसरी लहर के बाद पोस्ट कोविड समस्याएं सामने आई थी। राहत की बात है कि तीसरी लहर के बाद पोस्ट कोविड समस्याएं न के बराबर है।
दूसरी लहर के बाद सबसे अधिक पोस्ट कोविड समस्याएं सामने आई थी। आईएमए के अध्यक्ष एवं फिजिशियन डॉ. विपिन गुप्ता कहते हैं कि प्रथम एवं दूसरी लहर के बाद पोस्ट कोविड समस्याएं सामने आई थी। मधुमेह के नए रोगी निकल रहे हैं। कोविड पीडि़त मरीजों को उपचार में स्टेरॉयड दी गई, जिससे ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है। प्री डायबिटीज भी डायबिटीज हो गए। इसके अतिरिक्त तनाव बढऩे से ब्लड शुगर का स्तर बढ़ गया और लोग मधुमेह के रोगी बन गए।
डॉ. यूएस वार्ष्णेय कहते हैं कि प्रथम एवं दूसरी लहर के बाद सांस, निमोनिया, कमजोरी, फेफड़े और हार्ट अटैक के केस बढ़ गए थे। तीसरी लहर के बाद वैसा कुछ नहीं दिख रहा है। यह सामान्य सर्दी, खांसी, बुखार की तरह निकल गया। पोस्ट कोविड मरीज भी न के बराबर हैं। डॉ. वार्ष्णेय कहते हैं कि मधुमेह के मरीज तो पहले से ही अधिक है। कोविड काल में उपचार बंद रहने से सामने नहीं आए। महामारी के बाद स्वास्थ्य जागरूकता में भी इजाफा हुआ था। अब लोग दिक्कत होने पर जांच करा रहे हैं। इसकी वजह से वैसे रोगी भी सामने आ रहे हैं, जो पहले से मधुमेह से पीड़ित थे, लेकिन वह स्वयं इस बात से अनभिज्ञ थे। यह भी सच है कि स्टेरॉयड की अधिकता से लोग मधुमेह के मरीज बने हैं।
पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय के डॉ. एसके सिंघल कहते हैं कि मधुमेह के नए रोगी सामने आ रहे हैं। ३५ वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोग ज्यादा हैं। महिलाएं भी चपेट में आई हैं। जेएन मेडिकल कॉलेज के टीबी एंड चेस्ट रोग विभाग के प्रो. मोहमद शमीम कहते हैं कि पहली एवं दूसरी लहर के बाद तो पोस्ट कोविड मरीज आए थे। सांस, फेफड़े एवं अवसाद ग्रस्त मरीज ज्यादा आते थे। तीसरी लहर (ओमिक्रॉन वैरिएंट) के बाद पोस्ट कोविड केस नहीं हैं।