दीपक शर्मा
अलीगढ़। पिता की मौत के बाद एक क्लर्क की नौकरी से शुरुआत करने वाले सैयद अहमद खान का विश्वविद्यालय की स्थापना तक का सफर अपने आप में एक इतिहास है।
शिक्षा के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व और ऐतिहासिक योगदान को देखते हुए महात्मा गांधी ने उन्हें शिक्षा जगत का पैगंबर तक कहा था। 17 अक्टूबर 1817 को दिल्ली में पैदा हुए सर सैयद कि आगामी 17 अक्टूबर को 204 वीं जयंती है।
सर सैयद ने 1875 में एक स्कूल के रूप में जो पौधा लगाया था आज उसकी शाखाएं दुनिया के 110 से ज्यादा देशों में फैल चुकी हैं।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मामलों के जानकार और उर्दू एकेडमी के पूर्व डायरेक्टर डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि यहां पर पारंपरिक और आधुनिक शिक्षा में 250 से अधिक कोर्स करवाए जाते हैं। विश्वविद्यालय के कई कोर्स में सार्क और राष्ट्रमंडल देशों के छात्रों के लिए सीटें आरक्षित हैं। औसतन हर साल लगभग 500 फॉरेन स्टूडेंट्स एएमयू में एडमिशन लेते हैं। यूनिवर्सिटी कुल 467.6 हेक्टेयर जमीन में फैली हुई है।
डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि एएमयू अपनी लाइब्रेरी के लिए भी जाना जाता है। विश्वविद्यालय की मौलाना आजाद लाइब्रेरी में 13.50 लाख पुस्तकों के साथ तमाम दुर्लभ पांडुलिपियां भी मौजूद हैं। इसमें अकबर के दरबारी फैजी की फारसी में अनुवादित गीता, 400 साल पहले फारसी में अनुवादित महाभारत की पांडुलीपि, तमिल भाषा में लिखे भोजपत्र, 1400 साल पुरानी कुरान, सर सैयद की पुस्तकें और पांडुलिपियां आदि शामिल है।
दोपहर में महेंद्र प्रताप को खेलते देख सर सैयद बोले पढ़ाई करो, तुम्हारे पिता मेरे मित्र हैं
सर सैयद से जुड़े प्रसंगों का राजा महेंद्र प्रताप ने अपनी आत्मकथा माय लाइफ स्टोरी में किया है जिक्र
अलीगढ़। सर सैयद अहमद खान के विषय में राजा महेंद्र प्रताप ने भी अपनी आत्मकथा माय लाइफ स्टोरी में जिक्र किया है। राजा महेंद्र प्रताप के पिता सर सैयद अहमद खान के मित्र थे। राजा महेंद्र प्रताप की कॉलेज की शिक्षा मोअम्डन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज से ही हुई थी। राजा महेंद्र प्रताप लिखते हैं कि, मुझे दोपहर में एक घंटा खेलने के लिए मिलता था। मुझे याद है कि एक बार मैं अपने कमरे के पास अपने कुछ साथियों के साथ खेल रहा था। हमेशा की तरह सर सैयद आए, लेकिन इस दिन उनकी घोड़ा गाड़ी आकर रुक गई। उन्होंने मुझे बुलाया। मैं दौड़ कर उनके पास गया। उन्होंने कहा कि तुम्हारे पिता मेरे बहुत अच्छे मित्र हैं इसलिए मैं चाहता हूं कि तुम पढ़ाई में ठीक से उन्नति करो। इसके बाद राजा महेंद्र प्रताप लिखते हैं कि एक अन्य अवसर पर मैंने देखा कि सर सैयद अहमद क्रिकेट मैच देख रहे थे। उनके पौत्र रॉस मसूद जो कि बहुत हंसमुख किस्म के इंसान थे, वह भी उनके साथ थे। रॉस मसूद के लिए फ्राई किए हुए अंडे आए। उन्होंने अंडे तो खाए, लेकिन प्लेट मुझे सर्व नहीं की। संभवत धार्मिक कारणों से उन्हें इसकी हिचकिचाहट रही होगी। इस घटना के कुछ दिनों बाद सर सैयद का निधन हो गया। वह मेरे लिए बहुत दुख का दिन था।
दूसरा ऐसा मौका जब सादगी से मनाई जा रही है जयंती
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के 100 वर्ष के इतिहास में यह दूसरा ऐसा मौका है जब सर सैयद की जयंती मनाई जा रही है और परिसर में छात्र नहीं है। अधिकांश कार्यक्रम ऑनलाइन आयोजित किए जाएंगे। छात्र शिक्षक और पूरी दुनिया में फैली हुई अलीग बिरादरी यह उम्मीद कर रही है कि वर्ष 2022 में जब सर सैयद डे का आयोजन हो तब अपनी पुरानी रंगत और शान बान के साथ हो।
एएमयू.....
- 1875 सर सैयद अहमद खान ने आधुनिक शिक्षा की आवश्यकता को महसूस किया और एक स्कूल शुरू किया
-1877 में मोअम्डन एंग्लो ओरिएंटल कालेज बन गया
-कॉलेज के पहले स्नातक बाबू ईश्वरी प्रसाद थे
-1920 कॉलेज को विश्वविद्यालय का दर्जा मिला और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अस्तित्व में आया
-पहली चांसलर बेगम सुल्तान जहां थी
विश्वविद्यालय ने जयंती के लिए कार्यक्रम जारी किया
अलीगढ़। 17 अक्टूबर सर सैयद जयंती के लिए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कार्यक्रम जारी कर दिया गया है 17 अक्टूबर रविवार को सुबह कुरान ख्वानी की जाएगी। इसके बाद सर सैयद की मजार पर चादरपोशी होगी। मुख्य कार्यक्रम ऑनलाइन संचालित किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में पूर्व मुख्य तीर्थ सिंह ठाकुर संबोधित करेंगे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की सभी प्रमुख इमारतों पर सजावट की जाएगी।