अलीगढ़। महात्मा गांधी की जयंती पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में कार्यक्रम आयोजित किए गए।
विश्वविद्यालय की मौलाना आज़ाद लाइब्रेरी द्वारा आयोजित आनलाइन समारोह में कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से गहरा संबंध था और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने कई बार अलीगढ़ का दौरा किया।
एएमयू के मौलाना आजाद पुस्तकालय में उनकी यादों को संजोए कई पत्र और तस्वीरें सुरक्षित हैं। एएमयू छात्र संघ ने पहली आजीवन सदस्यता प्रदान की तथा महात्मा गांधी की अपील पर छात्रों ने स्वदेशी आंदोलन का प्रचार किया।
इससे पहले कुलपति ने महात्मा गांधी के जीवन की सभी महत्वपूर्ण घटनाओं को दर्शाने वाली दुर्लभ पुस्तकों, दस्तावेजों, पत्रिकाओं और संरक्षित तस्वीरों की आनलाइन प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
प्रोफेसर ए आर किदवई ने कहा कि गांधी की शिक्षा हिंसा से बचने और संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान को बढ़ावा देती है।
प्रोफेसर रमेश चंद ने बताया कि गांधीवाद ‘सादा जीवन और उच्च विचार’ की मूल धारणा से प्रारंभ होता है और इसका उद्देश्य व्यक्ति और समाज को बदलना है।
एएमयू के छात्र यासिर अली खान (पीएचडी) और छात्रा शरमीन (बीए आनर्स) ने गांधी जयंती के परिदृश्य में अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि किस प्रकार महात्मा गांधी ने अहिंसा के माध्यम से सभी समस्याओं के समाधान के लिए काम किया और कैसे अहिंसा पर आधारित उनके विचार आज भी प्रासांगिक हैं।
कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर एफ एस शीरानी ने किया और प्रोफेसर निशात फातिमा ने धन्यवाद प्रस्ताव ज्ञापित किया।