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दुनिया की यात्रा करने वाले राजा महेंद्र प्रताप पर नहीं था हिंदुस्तानी पासपोर्ट अफगानिस्तान के पासपोर्ट पर यात्राएं की, वहीं पर बनाई थी पहली अंतरिम निर्वासित सरकार

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दीपक शर्मा अलीगढ़। 50 से अधिक देशों की यात्रा करने वाले स्वतंत्रता सेनानी राजा महेंद्र प्रताप के पास भारतीय पासपोर्ट नहीं था। अंग्रेज सरकार से पासपोर्ट हासिल करने की बात संभव ही नहीं थी। यह सभी यात्राएं राजा महेंद्र प्रताप ने अफगानिस्तान सरकार के द्वारा दिए गए पासपोर्ट पर की थी। 14 सितंबर को राजा महेंद्र प्रताप के नाम पर राज्य विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया जा रहा है। ऐसे में स्वतंत्रता संग्राम में उनके दिए योगदान पर भी चर्चा हो रही है। राजा महेंद्र प्रताप की आत्मकथा माय लाइफ स्टोरी को संपादित करने वाले डॉक्टर वीर सिंह ने राजा महेंद्र प्रताप की विदेश यात्राएं और उनके अफगानिस्तान सरकार द्वारा दिए गए पासपोर्ट के संबंध में पुस्तक में स्पष्ट रूप से जिक्र किया है। अफगानिस्तान में ही राजा महेंद्र प्रताप ने भारत की पहली अंतरिम निर्वासित सरकार बनाई थी। आत्मकथा में जिक्र मिलता है कि राजा महेंद्र प्रताप ने हिंदुस्तान छोड़ने से पहले देहरादून के जिलाधिकारी कार्यालय के माध्यम से पासपोर्ट बनवाने का प्रयास किया था। लेकिन एक अखबार में जर्मनी के समर्थन में एक लेख लिखने के कारण पासपोर्ट बनने में बाधा पैदा हुई थी। इसके बाद राजा महेंद्र प्रताप ने समुद्र मार्ग से ब्रिटेन पहुंचने की योजना बनाई। वह देहरादून से पहले मुंबई पहुंचे। बाद में वहां से समुद्र के रास्ते से ही यूरोप पहुंचे। राजा महेंद्र प्रताप ने यूरोप के स्वीट्जरलैंड, जर्मनी, तत्कालीन सोवियत संघ के अलावा जापान, चीन, अफगानिस्तान, ईरान, तुर्की आदि देशों की यात्रा की थी। 1946 में कांग्रेस और जवाहरलाल नेहरू के प्रयासों से शर्तों के तहत वह हिंदुस्तान वापस आ सके थे।
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