अलीगढ़। पढ़ाई खत्म होने के बाद महामारी के चलते अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पढ़ने वाला यमन का एक छात्र अपने देश नहीं लौट पाया। इस दौरान वीजा समाप्त होने के बाद आवेदन किए जाने के बावजूद भी वीजा अवधि तो नहीं बढ़ी उल्टे लखनऊ स्थित विदेश मंत्रालय के कार्यालय की ओर से उस पर 50000 रुपये का आर्थिक दंड और लगा दिया गया है।
पोस्ट ग्रेजुएशन के छात्र ( छात्र के आग्रह पर उसका नाम नहीं दिया जा रहा) की दलील है कि विदेश मंत्रालय के द्वारा जून 2020 में एक आदेश जारी किया गया था जिसमें कहा गया था कि वह लोग जो फ्लाइट न चल पाने के चलते अपने देश नहीं लौट पा रहे हैं उनकी वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी उन पर किसी प्रकार की दंडात्मक कार्यवाही नहीं होगी।
इसके बाद भी छात्र पर 50 हजार रुपए का आर्थिक दंड लगाया गया है। जब कि छात्र का यह भी कहना है कि उसने अपने वीजा अवधि के विस्तार के लिए पहले ही आवेदन कर रखा है।
अपनी समस्या को लेकर छात्र बुधवार को विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर कार्यालय भी पहुंचा। यहां पर छात्र में भारत सरकार द्वारा वीजा संबंधी नियमों में दी गई राहत का शासनादेश भी दिखाया। साथ ही उसके द्वारा किए गए आवेदन और अन्य जरूरी औपचारिकताओं के दस्तावेज भी दिखाए।
प्रॉक्टर प्रोफेसर वसीम अली ने कहा कि छात्र को भरोसा दिलाया गया है कि इस मामले में उसकी हर संभव मदद की जाएगी।
एएमयू के हाथ से चला गया वीजा अवधि के विस्तार का काम
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के हाथ से उनके यहां पढने वाले छात्रों के वीजा अवधि के विस्तार का काम अब विदेश मंत्रालय अपने हाथ में ले लिया है।
विश्वविद्यालय से जुड़े लोगों का कहना है कि करीब दो वर्ष पहले तक अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों के वीजा अवधि के विस्तार का काम विश्वविद्यालय के स्तर पर ही होता था। लेकिन अब सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन कर दी गई हैं। इसके बाद अब विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर ऑफिस से छात्र के बोनाफाइड स्टूडेंट होने का प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। इस प्रमाण पत्र को छात्र द्वारा ऑनलाइन आवेदन के समय अपलोड कर दिया जाता है। छात्रों का कहना है कि इस नई व्यवस्था से उन्हें बेहद जटिल और परेशानी भरी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।