अप्सरा सिनेमा के खाली बरामदे में बैठे हुए मैनेजर बांकेलाल
- फोटो : Amar Ujala
दीपक शर्मा
अलीगढ़। सिनेमा प्रदर्शन के बदलते माध्यम और बाद में महामारी का प्रकोप ने सिंगल स्क्रीन सिनेमा की कमर ही तोड़ कर रख दी है।
शहर में कुछ सिंगल स्क्रीन सिनेमा तो पहले ही बंद हो चुके थे, अब जो बचे हैं उनके सामने भी अपने अस्तित्व का संकट बन गया है। यही हालात रहे तो जल्द ही सिंगल स्क्रीन सिनेमा अतीत की यादों में सिमट कर रह जाएगा। सिंगल स्क्रीन सिनेमा के परदे से लोगों की आज भी खुशनुमा यादें जुड़ी हुई हैं। इन थिएटर के जर्जर भवन इस बात की गवाही देते हैं कि कभी यहां पर सितारों का मेला देखने के लिए शानदार भीड़ जमा होती थी।
अलीगढ़ में सिनेमा थिएटर का सफरनामा (बुजुर्ग और सिनेमा थिएटर से जुड़े लोगों की स्मृति के आधार पर)
-1947 में देश की स्वतंत्रता प्राप्ति तक अलीगढ़ के अंदर किसी भी सिनेमा थिएटर की बिल्डिंग होने का जिक्र नहीं मिलता है। लेकिन हां टेंट लगाकर थिएटर सिनेमा प्रदर्शन किया जाता था। यह टेंट कई महीनों तक लगे रहते थे।
-सबसे पहले किस सिनेमा थियेटर्स बिल्डिंग में रूबी सिनेमा का जिक्र मिलता है। जिसका अस्तित्व आज पूरी तरह समाप्त हो चुका है। उसकी जगह होटल है। 1950 के बाद हिंदुस्तान थिएटर के नाम से सिविल कोर्ट के पास एक अपने समय का आधुनिक थिएटर बना। जिसे तस्वीर महल के नाम से जाना जाता है। आज इसके नाम से ही उस जगह का चौराहा भी है।
-अचल तालाब पर सूर्य थियेटर, दुबे के पड़ाव पर चंद्रा सिनेमा, रॉयल सिनेमा, रूबी सिनेमा खत्म हो चुके हैं। निशात, नंदन, तस्वीर महल, कृष्णा, लक्ष्मी इन सिनेमा में किसी भी फिल्म का प्रदर्शन नहीं हो रहा है।
याद है शादी के बाद अप्सरा में देखी गई पहली फिल्म
शहर के प्रसिद्ध व्यापारी नेता और समाजसेवी मास्टर ओमप्रकाश और उनकी पत्नी राधा रानी कहती हैं कि शादी के बाद उन्होंने अप्सरा सिनेमा में पहली फिल्म नसीब अपना अपना देखी थी। उस समय मनोरंजन के साधन बहुत ही सीमित थे। सिनेमा देखने का अपना ही रोमांच था। अभी भी वह यादें सजों कर रखी हुई हैं।
1976 में फिल्म कभी कभी के साथ शुरू हुआ सफर, आज वीरानी है
अप्सरा सिनेमा पर कार्यरत बुजुर्ग मैनेजर बांकेलाल कहते हैं कि एक वक्त था जब यहां पर सिनेमा का प्रत्येक शो एक शानदार महफिल की तरह हुआ करता था। महामारी शुरू होने से पहले यहां पर फिल्म ग्रैंड मस्ती आखिरी फिल्म थी। अब यहां पर कोई भी फिल्म प्रदर्शित नहीं हो रही है। आगे क्या हालात रहेंगे इसको लेकर भी निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता।
सिनेमा इंजीनियरिंग का बेहतरीन नमूना था तस्वीर महल
40 साल तक सिनेमा थिएटर पर कार्यरत रहे पूर्व मैनेजर बुजुर्ग कांतिलाल शर्मा उर्फ लल्लो गुरु कहते हैं कि तस्वीर महल सिनेमा का थियेटर हॉल इस तरह बनाया गया था कि दर्शक कहीं भी बैठे उसको पर्दे पर विजन एक जैसा ही दिखाई देता था। इसके अलावा तस्वीर महल में लंदन से सिनेमा प्रोजेक्टर मंगाया गया था। यह अपने समय की बहुत आधुनिक तकनीक थी।
तस्वीर महल कि वह इमारत जो कभी सिनेमा प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र थी
- फोटो : Amar Ujala
तस्वीर महल कि वह इमारत जो कभी सिनेमा प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र थी
तस्वीर महल सिनेमा का मुख्य प्रवेश द्वार जो आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है
- फोटो : Amar Ujala
तस्वीर महल सिनेमा का मुख्य प्रवेश द्वार जो आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है
कांतिलाल शर्मा उर्फ लल्लो गुरु पूर्व मैनेजर सुरजीत सिनेमा
- फोटो : Amar Ujala
कांतिलाल शर्मा उर्फ लल्लो गुरु पूर्व मैनेजर सुरजीत सिनेमा
व्यापारी नेता मास्टर ओमप्रकाश अपनी पत्नी राधा रानी के साथ जिन्होंने शादी के बाद पहली फिल्म नसीब अपना अपना देखी
- फोटो : Amar Ujala
व्यापारी नेता मास्टर ओमप्रकाश अपनी पत्नी राधा रानी के साथ जिन्होंने शादी के बाद पहली फिल्म नसीब अपना अपना देखी