शहर के विभिन्न आयुर्वेदिक व यूनानी कॉलेजों में पढ़ने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राओं की तीन साल में होने वाली पढ़ाई छह साल में भी पूरी नहीं हो सकी है। इसका मुख्य कारण डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय द्वारा समय से परीक्षाएं आयोजित नहीं कराना है। परीक्षाएं न होने से किसी को डिग्री नहीं मिली है। ऐसे में अध्ययनरत सैकड़ों विद्यार्थी परेशान हैं। बता दें कि डॉक्टरों के लिए एमडी (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन) की डिग्री काफी महत्वपूर्ण होती है। यह एक पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री है, जो मेडिसिन के क्षेत्र में एक पाठ्यक्रम अथवा कार्यक्रम के लिए दी जाती है।
यह डिग्री विशेषज्ञता यानि ज्ञानी द्वारा चुने हुए क्षेत्र के एक उन्नत अध्ययन प्राप्त करने पर आधारित है। डॉक्टर ऑफ मेडिसिन कोर्स को करने में तीन साल लगते है। जिसमें एक परीक्षा के सफल समापन सहित सैद्धांतिक (थ्योरी) और व्यावहारिक (प्रैक्टिकल) दोनों चीजे शामिल होती हैं। अलीगढ़ जिले में विभिन्न यूनानी अथवा आयुर्वेदिक कॉलेजों में 2015 से दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की डिग्री अभी तक पूरी नहीं हुई है। विद्यार्थियों ने एक परीक्षा देकर अपने शोध जमा तो करा दिए हैं, लेकिन इनके नंबर नहीं मिले हैं। न ही शोध की मौखिक परीक्षा और अंतिम परीक्षा हुई है। ऐसे में सैकड़ों छात्र-छात्राएं अपने भविष्य को लेकर परेशान हैं।
साईं कॉलेज में एमडी आयुर्वेद पाठ्यक्रम में 2015 में दाखिला लिया था। अंतिम वर्ष की परीक्षा अभी हाल ही में हुई हैं। अंतिम प्रयोगात्मक परीक्षाओं का इंतजार है। तीन साल की डिग्री छह साल में भी अभी तक नहीं मिल पाई है।
-डॉ. पवन कुमार
-2015 में एसीएन कॉलेज में एमडी पाठ्यक्रम में दाखिला लिया था। 2018 में प्रथम वर्ष के एग्जाम हुए। लेकिन अभी तक मार्कशीट नहीं मिली है। शोध जमा करा दिया है, इसके नंबर नहीं मिले। न ही अंतिम वर्ष की परीक्षाएं हुई हैं। सभी परेशान हैं।
-डॉ. सबीहा सफात
-2015 में एमडी की पढ़ाई शुरू की थी। लेकिन अभी तक डिग्री पूरी नहीं हुई है। आखरी परीक्षा और शोध का वायवा बचा है। आगरा विवि ने अभी तक छात्रों की समस्या को लेकर इस संबंध में कोई संज्ञान नहीं लिया है। विद्यार्थी परेशान हैं।
-डॉ. शाहिद मलिक
-अभी हाल ही में प्रभार लिया है। बीएएमस की लंबित चली आ रहीं 2015 तक की सभी परीक्षाएं सितंबर में आयोजित कराने का फैसला लिया है। प्रयास रहेगा कि जल्द ही एमडी अथवा अन्य लंबित परीक्षाओं को भी संपन्न कराया जाए। जिससे छात्रों की समस्या का समाधान हो जाए।
-अजय कृष्ण यादव, परीक्षा नियंत्रक, आगरा विवि