अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 1964 में हुए दीक्षांत समारोह में आए लाल बहादुर शास्त्री
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दीपक शर्मा
अलीगढ़। जय जवान जय किसान का नारा देने वाले पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की कुछ स्मृतियां अलीगढ़ से भी जुड़ी हुई हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के 1964 में दीक्षांत समारोह में लाल बहादुर शास्त्री में शिरकत की। उनको विश्वविद्यालय ने डिलीट की मानद उपाधि भी प्रदान की थी। 11 फरवरी को उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर एएमयू सहित पूरी अलीग बिरादरी उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित कर रही है।
एएमयू उर्दू एकेडमी के पूर्व निदेशक और एएमयू के इतिहास के मामलों के जानकार डा. राहत अबरार कहते हैं कि गांधीजी की तरह ही लाल बहादुर शास्त्री दिसंबर 1964 में एएमयू आये थे। जब लाल बहादुर शास्त्री देश के प्रधानमंत्री थे। तब दीक्षांत समारोह में उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया गया था। उन्होंने एएमयू में दीक्षांत भाषण दिया। विश्व विद्यालय की ओर से लाल बहादुर शास्त्री को एएमयू ने डॉक्टरेट ऑफ लॉ की 'मानद' उपाधि दी गई थी.
उस समय अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति बदरुद्दीन तैयब थे। यह कार्यक्रम अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मैकडोनाल्ड हॉस्टल और क्रिकेट ग्राउंड के पास हुआ था। इस कार्यक्रम में परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के जनक और महान वैज्ञानिक डॉक्टर होमी जहांगीर भाभा को डॉक्टरेट ऑफ साइंस की 'मानद' डिग्री दी गई।
डॉ. अल्बर्ट लीलार को एलएलडी की 'मानद' उपाधि दी गई। वहीं इतिहासकार डॉ. गेंदा सिंह को 'डी लिट' की उपाधि प्रदान की गई थी। चांसलर नवाब अहमद सईद खान छतारी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की थी। डॉ. अबरार कहते हैं कि उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय सहित पूरी अधिक बिरादरी उन्हें श्रद्धा से नमन करती है।
स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मेलन में भाग लेने के लिए भी आए थे
अलीगढ़। स्वतंत्रता मिलने के बाद लाल बहादुर शास्त्री स्वतंत्रता सेनानियों के एक सम्मेलन में भाग लेने के लिए अलीगढ़ आए थे। उन्हें उस समय के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता नवाब सिंह चौहान ने आमंत्रित किया था। इसके साथ ही अलीगढ़ में लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर एक गर्ल्स डिग्री कॉलेज भी है।