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महामारी के दौरान ताजा हुई 50 वर्ष पुरानी यादें विष्णु प्रभाकर के साथ खिंचा छायाचित्र हाथ लगा

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अलीगढ़। कोरोना वायरस के कारण फैली महामारी के दौरान लोगों को जहां नए प्रकार के अनुभव हुए हैं, वहीं दूसरी ओर गुजरे जमाने में झांकने का भी अवसर मिला है।  बन्ना देवी की प्रतिमा कॉलोनी के निवासी गोपाल कृष्ण सारस्वत 50 वर्ष पहले अपने कॉलेज में हुए एक समारोह में शामिल होने आए दिग्गज साहित्यकार और लेखकों के साथ अपने बिताए समय को याद करते हैं।  गोपाल कृष्ण सारस्वत कहते हैं कि 1970 में वह सहारनपुर के महाराज सिंह डिग्री कॉलेज में पढ़ते थे। उस समय केरल की एक संस्था सु दक्षिणा के दो लोग उनके कॉलेज में मलयालम भाषा को सिखाने के लिए आए थे। कोर्स में सफल विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र दिए जाने थे। इसके लिए कॉलेज में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध साहित्यकार और लेखक विष्णु प्रभाकर, जैनेंद्र और डॉ. कपिला वात्स्यायन भी शामिल हुए थे। गोपाल कृष्ण सारस्वत कहते हैं कि उन्होंने अपना प्रमाण पत्र विष्णु प्रभाकर के हाथों से लिया था, जिसका छायाचित्र आज भी उनके पास सुरक्षित है। उस समय उन्हें अंदाजा नहीं था कि उनको प्रमाण पत्र दे रहा व्यक्ति इतना महान है। बाद में इस बात का अंदाजा हुआ और उनकी साहित्य में रुचि जागृत हुई जो आज भी बनी हुई है। इसी के साथ जब उन्हें पता चला कि जैनेंद्र मूल रूप से अलीगढ़ के ही रहने वाले हैं तो उन्हें स्वयं पर बहुत गर्व हुआ।  उन्होंने कहा कि आज पत्र लिखने का चलन बिल्कुल समाप्त हो गया है। स्मार्टफोन और आधुनिक गैजेट्स ने इन पुराने साधनों को समाप्त कर दिया है। लेकिन इनका महत्व हमेशा बना रहेगा।
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