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‘बा’ की भूमिका निभा रही हैं कस्तूरबा की पुरातन छात्राएं

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फोटो.. ‘बा’ की भूमिका निभा रही हैं कस्तूरबा की पुरातन छात्राएं प्वाइंटर -वर्तमान की विभिन्न संसाधन विहीन छात्राओं को अपने घर या आस पड़ोस में दे रही हैं शिक्षा -कस्तूरबा के आदर्शों के चलते कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के परिवार ने आपदा को बदला है अवसर में अमर उजाला ब्यूरो अलीगढ़। महात्मा गांधी की पत्नी कस्तूरबा गांधी के संघर्ष को कौन नहीं जानता होगा। समाज ने उनके योगदान को देखते हुए ‘बा’ का नाम दिया था। उन्हीं के योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने 2004 में अनुसूचित जाति, जनजाति व पिछड़े वर्ग की बालिकाओं के लिए सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की स्थापना के लिए कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय योजना का शुभारंभ किया था। आज यह परिवार इतना बड़ा हो गया है कि जिले की पुरातन छात्राएं कोरोना संक्रमण काल में संसाधन विहीन वर्तमान छात्राओं को पढ़ाकर ‘बा’ की भूमिका निभा रही हैं। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय अतरौली में 100 प्रतिशत छात्राएं इस व्यवस्था से लाभान्वित हो रही हैं। 2019-20 की पास आउट छात्राएं रश्मि कुमारी, संजना, दुर्गेश कुमारी, प्रियंका और 2018-19 में पास आउट स्वाति कुमारी व मुस्कान कुमारी अपने घर में पड़ोस की कुल 66 छात्राओं को शिक्षा प्रदान कर रही हैं। वहीं वर्तमान में इसी विद्यालय में कक्षा आठ में पढ़ने वाली छात्राएं सोनी कुमारी, ,भावना, अंजू, छाया, लतेश, रिंकी, वर्षा, काजल, आफरीन आदि भी पड़ोस के बच्चों को पढ़ाने में लगी हुई हैं। इसके अलावा जवां ब्लॉक में 2013 की पास आउट विनीता व रेनू 15 छात्राओं को पढ़ा रही हैं। 2020 में आठ पास करने वाली छात्रा शीतल 5 छात्रोंओं को पढ़ा रही हैं। नगर क्षेत्र में 2019 की छात्रा गीता व संजना 10 छात्राओं को, 2018 की प्राची सरिता 8 छात्राओं और 2020 की जैनव 3 छात्राओं को पढ़ा रही हैं। गोंडा से 2018 की छात्रा सोनिया, अंजू व कीर्ती 27 छात्राओं को, खैर में 2019 की शारदा, शिवानी कुल 12 छात्राओं को, ललिता 5 छात्राओं को पढ़ा रही हैं। टप्पल की पुरातन छात्रा रश्मि, स्नेहा, प्रिया, वर्षा, डॉली, ज्योति कुल 51 छात्राओं को विभिन्न समूह में अपने घरों पर पढ़ा रही हैं। इगलास में 2017 की सुनता 5 छात्राओं को, राधा 8 छात्राओं को पढ़ा रही हैं। लोधा में तनश 10 छात्राओं को, 2016 की गुड़िया 6 छात्राओं को, 2017 की अंशू 5 छात्राओं को, 2019 की शिवानी 7 छात्राओं को पढ़ा रही हैं। अकराबाद में 2018 की संदरी 20 छात्राओं को, 2017 की रेखा 24 छात्राओं को, 2020 की वंदना 27 छात्राओं को उनका पाठ्यक्रम तैयार करा रही हैं। धनीपुर ब्लॉक में आनलाइन छात्राएं पढ़ रही हैं। जबकि बिजौली में 2017 की रीना व अनीता कुल 12 छात्राओं को पढ़ा रही हैं। चंडौस और गंगीरी में आनलाइन पढ़ाई जारी है। बा की भूमिका निभाने वाली यह वह छात्राएं हैं, जो विगत वर्षों में कस्तूरबा से आठ पास कर आगे की शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। जबकि पढ़ने वाली छात्राओं और उनके अभिभावकों के पास एंड्रॉएड फोन जैसे संसाधन नहीं हैं। ऐसे में विभाग की प्रेरणा पर पुरातन छात्राओं ने आपदा को अवसर बनाते हुए पड़ोस की वर्तमान छात्राओं को शिक्षा प्रदान करने का बीडा उठाया है। जिस प्रकार समाज सेवा के लिए कस्तूरबा गांधी (बा) अपना योगदान देती रहीं, उसी प्रकार पिछड़े वर्ग की इन छात्राओं को पढ़ाने का जिम्मा भी पुरातन छात्राओं ने ले लिया है। बयान -यह अनोखा प्रयास सफल हो गया है, इसके लिए कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की शिक्षिकाएं और स्टाफ तारीफ के काबिल हैं। कोरोना संक्रमण काल के समाप्त होने पर इस अनोखे प्रयास में भागीदारी के लिए पुरातन छात्राओं और शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। -डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय, बीएसए अलीगढ़। -कोरोना संक्रमण काल की आपदा को शिक्षकों ने अनोखे प्रयास से अवसर में बदला है। वहीं पुरातन छात्राएं जो सहयोग दे रही हैं, वह भी सराहनीय है। इतनी छोटी सी उम्र में समाजसेवा की खातिर मेहनत करना गुरुजनों की प्रेरणा है। मैं चाहूंगा कि बीएसए महोदय शिक्षिकाओं और छात्राओं को प्रोत्साहित करें। -अखिलेश मिश्र, जिला समन्वयक बालिका शिक्षा, समग्र शिक्षा अभियान। 
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