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अलीगढ़ : योगी जी, जलभराव, गंदगी, जाम, गंदा पानी का कराएं स्थायी निदान

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अलीगढ़ : रामघाट रोड किशनपुर तिराहे के पास हो रहे गड्ढों को भरते नगर निगम कर्मचारी। संवाद - फोटो : CITY OFFICE
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज शहर में आ रहे हैं। उम्मीद है कि शहर की कुछ ज्वलंत समस्याओं के स्थायी निदान पर विचार-विमर्श होगा, क्योंकि कहने के लिए हम स्मार्ट जरूर हो रहे हैं। शहर का विस्तार हो रहा है और आबादी भी बढ़ रही है लेकिन कुछ मूलभूत समस्याएं ऐसी हैं, जिनसे हर शहरवासी जूझ रहा है। इनके निदान के बारे में सोचा तो जाता है, लेकिन स्थायी समाधान की जगह विकल्पों पर जोर दिया जाता है। इन विकल्पों पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर दिए जाते हैं। अगर विकल्पों के बजाय स्थायी समाधान पर गौर हुआ होता तो अब तक खर्च हुए धन से स्थायी समाधान हो गया होता। ये समस्याएं हर आम शहरी की दैनिक जरूरतों से जुड़ी हैं। सड़क, सफाई, बिजली, पानी, स्वास्थ्य जैसी इन मूलभूत जरूरतों को लेकर शहरवासियों का गुस्सा उबाल मारता है तो उस समय मान-मनौव्वल कर शांत कर दिया जाता है। बाद में फिर सब पटरी पर चलने लगता है। पेश हैं, शहर के प्रमुख ज्वलंत मुद्दे --
ये पांच ज्वलंत समस्याएं
- कटोरेनुमा शहर में जलभराव
आज तक के ज्ञात इतिहास में कभी ऐसा नहीं हुआ कि बारिश हुई हो और शहर में जलभराव न हुआ हो। वह तो गनीमत कि शहर किसी नदी या नहर के किनारे नहीं है अन्यथा हालात और बुरे होते। ताजा बारिश ने जलभराव के इस दर्द को और ज्यादा बढ़ाया है। कहने को सिस्टम हर बार राग अलापता है कि शहर की भौगोलिक स्थिति कटोरेनुमा है। इसलिए इस समस्या को रोका नहीं जा सकता। मगर दलील यह है कि इसके समधान को तो खोजा जा सकता है। ऐसे प्रयास तो हो सकते हैं कि पानी सड़कों, कालोनियों व बस्तियों में भरने के बजाए सीवर और नाले-नालियों के रास्ते शहर से बाहर निकल जाए।
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- सफाई इंतजाम के बाद बजबजाते नाले
शहर में आजादी से पहले की सीवरेज-ड्रेनेज व्यवस्था है। शहर का दायरा व आबादी बढ़ने के साथ उस पर दबाव बढ़ा है। उसे दुरुस्त रखने के नाम पर प्रतिवर्ष सफाई का दावा किया जाता है। इसके बावजूद नाले-नालियां बजबजाते रहते हैं, सीवर चोक होने का शोर मचता रहता है। शहर की गंदगी इन रास्तों से शहर के बाहर नहीं पहुंच पाती। जो जलभराव का कारण बनती है। नियमित सफाई के अभाव में कूड़े के ढेर नालियों में पहुंच जाते हैं। जो जलनिकासी में बाधक बनते हैं। कई जगहों पर नालों पर अतिक्रमण व अवैध कब्जे भी अवरोधक बनते हैं।
- कहीं पेयजल संकट तो कहीं गंदे पानी की आपूर्ति
शुद्ध पेयजल आपूर्ति न होना शहर की सबसे बड़ी समस्या है। जलस्तर लगातार घट रहा है। नगर निगम जरूरत के अनुसार पानी की आपूर्ति देने में सक्षम नहीं है। पुराने शहर के अनगिनत इलाके ऐसे हैं, जहां आबादी या तो गंदा पानी पीने को मजबूर होती है या गर्मी में उन्हें पानी के लिए इधर उधर भटकना पड़ता है। कहने को अमृत योजना के तहत शहर में पानी की आपूर्ति दुरुस्त करने का प्रयास चल रहा है। मगर यह प्रयास अभी तक नाकाफी साबित हुआ है। लगातार शहर को सुमेरा झाल से गंगाजल की आपूर्ति के लिए आवाज उठती रहती है। इस दिशा में कोई ठोस कदम आज तक नहीं उठाया गया। दूसरा पानी की समस्या के समाधान के लिए वाटर सर्फेश स्कीम भी एक बेहतर विकल्प हो सकता है।
-अतिक्रमण और जाम से दिन भर जूझता शहर
अतिक्रमण और जाम। ये इस शहर की ऐसी समस्याएं हैं, जिनसे दिन भर आम व खास शहरी जूझता है। प्रशासनिक अधिकारी भी इससे जूझते हुए गुजरते हैं, मगर इसके समाधान पर सिर्फ दिखावटी प्रयास ही होते दिखते हैं। अतिक्रमण के नाम पर सड़कों पर पार्किंग सबसे बड़ा अतिक्रमण है। अनगिनत जगहों पर अवैध कब्जे अतिक्रमण का बड़ा कारण हैं। पार्किंग का अभाव अतिक्रमण का बड़ा कारण हैं। ऑटो-टेंपो आदि के सड़कों पर बने स्टैंड अतिक्रमण व जाम का बड़ा कारण हैं। सड़क चौड़ी कर कुछ जगह फुटपाथ बनाए गए। मगर उन पर भी अतिक्रमण काबिज हैं। ऐसे में स्कूल जाते या लौटते बच्चे, अस्पताल जाते मरीज किस तरह जाम से जूझते हैं, ये सभी देखते हैं। मगर समाधान के नाम पर ढाक के तीन पात हैं।
-डॉक्टरों की कमी के चलते रेफरल यूनिट बने अस्पताल
स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार का विशेष फोकस है। हमारे जिले में जिला अस्पताल के साथ-साथ दीनदयाल संयुक्त अस्पताल जैसे तो बड़े अस्पताल हैं। मगर रेफरल यूनिट की तर्ज पर ये दोनों अस्पताल काम करते हैं। इमरजेंसी में सिर्फ मरीज को देखकर और प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर करने मात्र की सुविधा इन दोनों अस्पतालों में है। इसके पीछे की मूल वजह विषय विशेषज्ञ डॉक्टरों का अभाव है। संसाधनों की कमी नहीं, बस डॉक्टर व स्टाफ की कमी इस समस्या की मूल वजह है। हालात ये हैं कि पिछले दो माह से जिला अस्पताल में स्थायी फिजीशियन नहीं हैं। एक मात्र सर्जन के सहारे जिला अस्पताल संचालित हो रहा है। कमोबेश ऐसे ही हालात दीनदयाल अस्पताल के हैं।
इन पर भी ध्यान दें
- शहर के चारों ओर बाईपास नहीं है। अगर बाईपास हो तो शहर के अंदर भारी वाहन न आएं और कई मार्गों की रोडवेज बसें भी बाहर से ही गुजरें।
- ओवरलोड विद्युत व्यवस्था में सुधार जरूरी। पुरानी आबादी व नई आबादी में कई जगहों पर विद्युत संकट ओवरलोडिंग कम होने से ही सुधारा जा सके।
- सफाई व्यवस्था बेहतर होने का अभाव। एटूजेड प्लांट व नगर निगम कूड़ा प्रबंधन का दावा करता है, यदि सुधार हो तो नाले-नालियां कूड़े से अटने से बचें।
- आबादी क्षेत्र में सड़कों में गड्ढे दूर हों। स्मार्ट सिटी के तहत काम हो रहे हैं। मगर कुछ इलाके ऐसे हैं, जहां सड़कों में अमूलचूल सुधार की जरूरत है।
- शहरी विकास को सभी विभागों में समन्वय जरूरी। शहरी विकास के लिए कुछ विषय ऐसे हैं, जिनमें सभी विभागों में समन्वय का अभाव है। जलनिकासी, जाम आदि दूर हो सकते हैं।
- ये बिल्कुल सही है कि शहर को जलनिकासी/जलभराव के समाधान के लिए बड़े स्थायी विकल्प की जरूरत है। इस पर विशेष तौर पर काम हो। इसके अलावा वैध पार्किंग, बाईपास, पेयजल संकट आदि पर भी काम होने की जरूरत है। ये विषय मुख्यमंत्री के समक्ष रखे जाएंगे। - सतीश गौतम, सांसद
- रिंग रोड व जलनिकासी के स्थायी समाधान पर विशेष जरूरी काम होने चाहिए। रिंग रोड होगा तो शहर में बाहरी वाहनों का दबाव कम होगा। जलनिकासी पर हमारे स्तर से जो किया गया, उसे आगे और बढ़ाया जाएगा। अगली बार फिर नए सिरे से प्रयास होंगे। - मो.फुरकान, मेयर
- शहरी विकास के लिए विभागीय समन्वय बेहद जरूरी है। जलभराव पर अधिकारी शहर को कटोरेनुमा बताकर पल्ला झाड़ते हैं। बस व्यक्तिगत हितों से जुड़े कार्यों को अधिकारी प्राथमिकता में रखते हैं। जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए बड़ी जरूरत है। ये विषय मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा।-अनिल पाराशर, विधायक कोल क्षेत्र
- जलभराव के साथ-साथ शहर में पेयजल संकट बड़ा विषय है। जैसे बारिश में लोग जलभराव से त्रस्त रहते हैं, वैसे ही गर्मी में पेयजल संकट शहर का बड़ा मुद्दा रहता है। इस पर सुमेरा झाल से गंगाजल या वाटर सर्फेस सिस्टम पर काम होना जरूरी है। मुख्यमंत्री के समक्ष चर्चा रखी जाएगी। बेहतर विकल्पों पर काम कराने का प्रयास होगा।-मुक्ता संजीव राजा, विधायक शहर क्षेत्र
- शहर के हालात किसी से छिपे नहीं हैं। आज जब मुख्यमंत्री शहर में आने वाले हैं तो शहर को संवारा व चमकाया जा रहा है। बाकी दिनों में शहरवासी समस्याओं से जूझते रहते हैं। हाल में हुआ जलभराव किसी से छिपा नहीं है। स्मार्ट रोड पर मौत किसी से छिपी नहीं है। इन समस्याओं के स्थायी समाधान बेहद जरूरी हैं।-संतोष सिंह, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
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- स्मार्ट सिटी के नाम पर शहर की जनता को बेवकूफ बनाया गया है। ग्रहकर की कीमतें बढ़ाकर परेशान किया जा रहा है। मगर समाधान के नाम पर शहर में कोई ऐसा काम सिस्टम गिना दे, जिसके सहारे कहा जा सके कि शहरवासियों को राहत मिली है। जलभराव, पेयजल संकट, स्वास्थ्य, बिजली आदि से लोग परेशान हैं।-अज्जू इशहाक, पूर्व सपा महानगर अध्यक्ष
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