जिला अस्पताल के ब्लड बैंक को भी खून देते समय अपने यहां मरीज के सैंपल की जांच करनी थी। इन तथ्यों के आधार पर आयोग ने आदेश दिया है कि एक लाख रुपया उपचार खर्च नौ फीसदी ब्याज दर से तीनों लोग पीड़ित को भुगतान करेंगे। साथ में 25 हजार रुपया वाद खर्च दें। इसके अलावा, इतनी बड़ी लापरवाही पर तीनों लोग 45 लाख रुपया उपभोक्ता वेलफेयर फंड में जमा करेंगे।
बमुश्किल बची युवती की जान, बेचने पड़े जेवर
आगरा के पुष्पांजलि हॉस्पिटल के निर्देश पर अलग-अलग पैथॉलॉजी से जांच कराई तो वहां ब्लड ग्रुप एबीओ-बी पॉजिटिव बताया गया। कई दिन के इलाज के बाद युवती की जान बच सकी। इस दौरान अलीगढ़ में ही उसकी किडनी पर असर पढ़ने लगा था। पीड़ित के अनुसार, जेवर बेचकर व कर्ज लेकर पीड़ित ने बेटी का इलाज कराया। इस याचिका पर जिला उपभोक्ता आयोग ने अशोका पैथोलॉजी के साथ-साथ डॉ. ज्ञान कुमार व जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी को दोषी माना है।