प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के दावे कर रही है। मगर पहले से डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे जिले की स्वास्थ्य सेवाएं बीमार हैं। पिछले दिनों हुए डॉक्टरों के तबादले के बाद आज तक डॉक्टरों की भरपाई नहीं हो पाई है। एक डॉक्टर तो ऐसे हैं, जो तबादले के बाद आज तक ज्वाइन करने नहीं आए और चार डॉक्टर ऐसे हैं, जो यहां से कार्यमुक्त नहीं किए गए। जैसे तैसे काम चलाया जा रहा है। तबादले के कारण जिला अस्पताल, दीनदयाल अस्पताल सहित जिले भर की सीएचसी-पीएचसी पर ओपीडी पर संकट गहरा गया है। दीनदयाल में नेत्र रोग विभाग पूरी तरह बंद पड़ा हुआ है।
जिला अस्पताल का हाल ये है कि 33 के सापेक्ष मात्र 17 डॉक्टर थे। इनमें से सात का गैर जनपद तबादला हुआ है। अब मात्र 11 स्थायी डॉक्टर तैनात हैं। वहीं 5 संबद्ध डॉक्टर हैं। इसमें भी ओपीडी संकट का बड़ा कारण एक सर्जन व फिजीशियन की कमी के कारण है। इसी तरह दीनदयाल अस्पताल 18 नियमित व 14 संविदा डॉक्टर तैनात हैं, जिनमें से 8 डॉक्टरों का तबादला हो गया है।
4 को कार्यमुक्त नहीं किया गया है। 9 संविदा के डॉक्टर हैं। इसी तरह जिला अस्पताल में कन्नौज से एक नेत्र सर्जन यहां तबादला कर भेजे गए हैं। मगर वे आज तक ज्वाइन करने नहीं आए। उनकी ओर से खुद को रोकने का अनुरोध लगातार किया जा रहा है। इधर, जिले के हालात पर गौर करें तो जिले की सीएचसी, पीएचसी, पोस्टमार्टम, इमरजेंसी ड्यूटी, वीआईपी ड्यूटी के लिए 217 के सापेक्ष अब तक 61 डॉक्टर तैनात थे, जिनमें से 18 के तबादले हो गए हैं। अब तक सीएचसी, पीएचसी पर दो दिन एक डॉक्टर को राउंड वार तैनाती देकर काम चलाया जा रहा था।
अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है। हालांकि कुछ डॉक्टर नए तैनात हुए हैं, मगर उनसे काम नहीं चल रहा है। उम्मीद है जल्द समस्या का समाधान होगा। फिलहाल जैसे-तैसे ओपीडी व इमरजेंसी सेवाएं सुचारू कराई जा रही हैं।
-डॉ. ईश्वर देवी बत्रा, सीएमएस, जिला अस्पताल
-मलखान सिंह व दीनदयाल सहित जिले भर के स्वास्थ्य महकमे से बड़े पैमाने पर डॉक्टरों के तबादले हुए हैं। प्रयास हैं, जल्द इस समस्या का समाधान हो।
-डॉ. नीरज त्यागी, सीएमओ