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अलीगढ़ : बाजार पहले से था तैयार, पर पूरी नहीं हो पा रही तिरंगे की डिमांड

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दुबे का पड़ाव पर तिरंगा झंडा की सिलाई करती रेखा और मीनाक्षी। संवाद - फोटो : CITY OFFICE
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अभिषेक शर्मा, अलीगढ़।
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75 वर्ष के इतिहास में यह पहला मौका होगा, जब बाजार राष्ट्रीय ध्वज की मांग की आपूर्ति नहीं कर पा रहा। पिछले एक माह से लगातार आर्डर आ रहे हैं। बात चाहे बाजार में बनने वाले तिरंगे की हो या फिर दिल्ली से आने वाले प्रिंटेड साटन के झंडे की। थोक विक्रेता परेशान हैं। एडवांस रुपये देने के बाद भी उन्हें माल समय पर और पूरा नहीं मिल पा रहा। वहीं, बनाने वालों को भी दिन-रात काम करना पड़ रहा है। इस व्यापार से जुड़ा हर व्यक्ति बस एक ही बात कह रहा है कि यह पहला मौका है। तिरंगे झंडे को लेकर ये स्थिति पहले कभी नहीं हुई।
इस वर्ष आजादी के अमृत महोत्सव पर हर घर तिरंगा अभियान मनाया जा रहा है। बाजार में पहले से खादी आश्रम के जरिये, बाजार में बनने वाले देशी झंडों के जरिये और मथुरा व सूरत में निर्मित साटन के दिल्ली से आने वाले झंडे के जरिये आपूर्ति होती रही है। मगर इस बार झंडे की पूर्ति नहीं हो पा रही। सूरत की साड़ी फैक्टरियों में साड़ियों का काम बंद हो गया है। फिर भी दिल्ली वाले माल नियत समय पर नियत डिमांड के अनुसार नहीं दे पा रहे।
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25 हजार मीटर कपड़ा खरीदा था, पूरा खप गया
मीनाक्षी पुल इलाके में तिरंगा बनाने वाले शोभित बंसल बताते हैं कि अभियान की घोषणा के साथ ही 25 हजार मीटर कपड़ा खरीदा था। अब तक पूरा कपड़ा खप गया है। 60 हजार से अधिक झंडे बेच चुके हैं। तीन साइज के झंडे तैयार कराए जा रहे हैं। खुद के कारीगरों के अलावा घरों में सिलाई का काम करने वाली महिलाओं से भी तिरंगे बनवाए जा रहे हैं। इसी तरह ऑफसेट प्रिंटेड माल दिल्ली से मंगाया जा रहा है, जो समय पर मिल नहीं पा रहा। उनकी तरह शहर में आधा दर्जन निर्माता हैं।
सुबह का ऑर्डर शाम तक दे पा रही दिल्ली
शहर के हलवाई खाना इलाके में साटन के तिरंगे का थोक व्यापार करने वाले संजय कुमार बताते हैं कि यह पहला मौका है, जब दिल्ली हमें सप्लाई नहीं दे पा रही। एक ही साइज का झंडा दिल्ली से मिल पा रहा है। वह भी सुबह का ऑर्डर शाम तक दे पाते हैं। एडवांस रुपया देने के बाद भी माल नहीं मिल रहा। अब तक अकेले 25 हजार से अधिक झंडे मंगाकर बेच चुके हैं। ऐसे शहर में कई दर्जन थोक विक्रेता हैं।
इस बार नहीं आ रहे टोपी, पटका और बैंड-बिल्ले
बाजार में इस बार दिल्ली से निर्मित होकर आने वाले टोपी, पटका, बैंड और बिल्ले नहीं आ रहे हैं। दिल्ली का हर निर्माता सिर्फ तिरंगा तैयार करने में लगा है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर जिनके पास पुराने टोली, पट्टका, बैंड व बिल्ले आदि रखे थे। उन्हें 5 से 10 रुपये तक कीमत बढ़ाकर बेचा जा रहा है।
सोशल मीडिया डीपी लगाने के लिए किया जा रहा प्रेरित
हर घर तिरंगा अभियान की सफलता के लिए सोशल मीडिया पर तिरंगा की डीपी लगाने संबंधी काम भी जारी है। महकमों में पीआर से जुड़े अधिकारी अपने विभाग व अपने संपर्क के लोगों को डीपी लगाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। पुलिस प्रशास के अलावा अधिकांश महकमों में वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर निचले स्तर तक के कर्मचारियों ने अपनी डीपी पर तिरंगा या तिरंगे के साथ फोटो लगाना शुरू कर दिया है।
हर हाल में पूरा करना आठ लाख झंडे बेचने का लक्ष्य
हर घर तिरंगा अभियान की सफलता के लिए सरकारी तंत्र के स्तर से अलग लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक अलग-अलग महकमों को आठ लाख झंडे की बिक्री का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसमें छह लाख झंडे महिला स्वयं सहायता समूहों के जरिये बनवाकर विभागों को दिए जा रहे हैं, जबकि दो लाख झंडे सूक्ष्म व लघु उद्योग विभाग द्वारा तैयार कराकर विभागों को दिए जा रहे हैं। तिरंगे बनकर सभी विभागों को पहुंचने लगे हैं, मगर अभी इस बात का हिसाब नहीं लग सका है कि किस विभाग पर कितने पहुंचे और कितने बिक गए।
17 और 21 रुपये निर्धारित है सरकारी दर
सरकारी महकमों द्वारा झंडे दो निर्धारित दरों 17 व 21 रुपये में बेचे जा रहे हैं। इसमें नगर निगम द्वारा जो भी बिल जमा करने आ रहा है, उसे बिल में कीमत लगाकर दी जा रही है और झंडा दिया जा रहा है। इसी तरह राशन की दुकान पर जो राशन लेने आ रहा है, उसे कीमत लेकर झंडे दिए जा रहे हैं। हां, बीपीएल कार्ड धारकों को यह झंडे निशुल्क देने की व्यवस्था की गई है। कुछ विभाग ऐसे हैं, जिन्हें अपने विभागीय परिवारों, उनसे जुड़े सदस्यों के परिवारों तक झंडे पहुंचाने का जिम्मा दिया गया है।
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ये हैं विभाग वार निर्धारित लक्ष्य
जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी - 10000, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी - 50,000, एलडीएम-25000, नगर निगम - एक लाख, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा-10000, लोक निर्माण विभाग - 25000, सेवायोजन विभाग - 5000, आरटीओ- 10000, समाज कल्याण अधिकारी - 10000, डूडा - 10,000, डीपीआरओ - 100000, डीओपीआईडीई - 2500, एएमयू -1000, सीएमओ - 50,000, डीएफओ - 10000, नेहरू युवा केंद्र - 2500, एडीएम सिटी - 50000, जीएमडीआईसी - 25000, डीएसओ - 50000, डिप्टी आरएमओ - 10000, पुलिस - 25000, जिला क्रीड़ा अधिकारी - 2000।
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