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अलीगढ़ : कान्हा की पोशाक का है करोड़ों का कारोबार, फिर भी नहीं पड़ रही पार

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श्री कृष्ण जन्माष्टमी के लिए बाजार पहले से तैयार है। अलीगढ़ शहर में लड्डू गोपाल बनते हैं और खास बात यह है कि जो लड्डू गोपाल यहां बनते हैं, वैसे कहीं पर नहीं बनते हैं। वहीं, कान्हा को पहनाई जाने वाली पोशाक और उनको संजाने संवारने के अन्य उत्पादों की बात करें तो इसका भी अपने शहर में कारोबार 25-30 करोड़ का है।
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इस बार कान्हा के भक्तों में गजब का उत्साह है, इसके चलते पोशाक व अन्य सामान की कमी पड़ने लगी है। निर्माता आपूर्ति नहीं दे पा रहे है, जो स्टॉक था, उसी से काम चलाया जा रहा है। शहर के सराय बारहसैनी दही वाली गली में पोशाक के थोक विक्रेता अन्नू खिलौना उर्फ अनुराग बताते हैं कि उन्होंने दो माह पहले माल का स्टॉक कर लिया था।
शहर में चार बड़े थोक विक्रेता हैं, जिन्होंने इसी तरह कई करोड़ रुपये लगाकर स्टॉक किया। कोरोना के बाद उबरे शहर में इस बार गजब का उत्साह है। हालात ये हैं कि अब माल ऊपर से मिल नहीं रहा है, जो वैराइटी उत्पाद लाए गए थे। उसमें अधिकांश माल बिक चुका है। अब बहुत कम वैराइटी बची हैं।
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इस बार बाजार में ये है नया
इस बार बाजार में कंप्यूटर पोशाक, राजकोट पोशाक नई आई थी, जिसकी खूब बिक्री हुई है। यह माल मथुरा से ही बनकर आया था।
ये उत्पाद भी होते तैयार
कोलकाता एवं सूरत की फैंसी पोशाक, जड़ी वाली पोशाक, लड्डू गोपाल का ट्रेवलिंग बैग, स्कूल बैग, मच्छरदानी, मास्क, कूलर, पंखे, एसी, राखी, इत्र, स्प्रे, मंदिर के पर्दे, आसन, लड्डू गोपाल के इंडोर गेम, खिलौने, गुजराती मीने के फैंसी झूले, कोलकाता के मोती के झूले, फैंसी फूल बंगले, गाय-बछड़े के सेट, भोग की थाली, माखन-मटकी, बच्चों की श्रीकृष्ण-राधा के फैंसी ड्रेस आदि।
पोशाक के काम में रम गए इरफान
क्वार्सी क्षेत्र निवासी इरफान अहमद लड्डू गोपाल व हिंदू देवी-देवताओं के पोशाक के काम में रम गए हैं। उन्हें इस काम में बहुत आनंद आता है। साथ ही रोज 400-500 रुपये कमा लेते हैं। इरफान कहते हैं कि 30 वर्ष से पोशाक का काम कर रहे हैं। मूलरूप से मथुरा के रहने वाले हैं। यहां पांच साल से रह रहे हैं।
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