न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
सावन मास में गर्मी से परेशान लोगों को हमेशा झमाझम बारिश का इंतजार रहता है। मगर, इस साल कम बारिश होने से सावन सूखा रहा, भादौं भी प्यासा ही बीत रहा है। सावन बीतने के बाद किसानों को आस थी कि भादौं में खूब बारिश होगी और उन्हें गर्मी से जरूर राहत मिलेगी। अगस्त में भी बारिश के कोई आसार नजर नहीं आ रहे।
हालत यह है कि इन दिनों सूरज के तेवर तीखे हैं और उमस देखने को मिल रही है। लोग पसीने से तरबतर हो रहे है। घर हो या बाहर, कहीं भी थोड़े समय के लिए रुकना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में पंखे और कूलर की हवा भी राहत नहीं दे रही है। मानसून की इस गर्मी ने एक बार फिर मई- जून में पड़ने वाली गर्मी का अहसास करा दिया है। इससे आमजन तो चिंतित हैं ही, खेती- किसानी से जुड़े लोग भी परेशान हैं।
मौसम विभाग ने मानसून की शुरुआत से पहले ही इस बार कम बारिश होने पर सूखे की भविष्यवाणी कर दी थी। जुलाई के बाद आधा अगस्त बीतने के बाद मौसम विभाग का अनुमान सही साबित हो रहा है। हालांकि बीच में हुई बरसात ने माहौल को थामने की कोशिश की। बावजूद इसके औसत बारिश के भी लाले पड़ गए।
सावन बीतने के बाद लोगों को आस थी कि भादौं में जरुर कुछ राहत मिलेगी। गर्मी और उमस से लोगों के दिन का चैन और रात का सुकून नदारद है। घर हो या बाहर कहीं भी थोड़े समय के लिए रुकना मुश्किल साबित हो रहा है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. राम पलट का कहना है धूप में बहुत तेजी नहीं है, लेकिन जुलाई के बाद वातावरण में घुली अत्यधिक आर्द्रता के चलते भारी उमस का अहसास हो रहा है। उन्होंने कहा कि आगे भी यही हालात रहे तो सूखे की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सावन के बाद भादौं में अत्यधिक बरसात होती है। इससे सबसे ज्यादा धान की फसल को नुकसान पहुंचेगा। क्योंकि, धान की फसल को कई दिनों तक लगातार पानी की जरूरत होती है। दलहन, चना, ज्वार, बाजरा, अरहर, मक्का, उड़द, मूंग जैसी फसलें भी बर्बाद हो जाएंगी। हालांकि बादल छा रहे हैं, लेकिन बिना बरसे साफ हो रहे हैं।