न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
खिरनीगेट स्थित श्री लख्मीचंद पांड्या खंडेलवाल दिगंबर जैन ट्रस्ट परिसर में चातुर्मास समिति एवं मुनि सेवा समिति तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिकारी एवं वैज्ञानिक संगोष्ठी का रविवार को समापन हो गया। वैज्ञानिक संत आचार्य निर्भय सागर ने जैन धर्म की प्राचीनता, जैन दर्शन का वैज्ञानिक स्वरूप, अहिंसा का वैज्ञानिक स्वरूप आदि विषयों पर शोध लेख प्रस्तुत किए।
संगोष्ठी में डॉ. राजमल जैन कोठारी ने कहा कि अहिंसा किसी भी परिस्थिति में दूसरों को नुकसान न पहुंचाने की व्यक्तिगत प्रथा है। इसरो के पूर्व वैज्ञानिक डॉ जीसी जैन ने सतत विकास चुनौतियों और संभावनाओं के लिए बुनियादी विज्ञान विषय पर जानकारी दी। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी मुरादाबाद के कुलाधिपति सुरेश जैन ने कहा कि भारत एक प्रभुसत्ता सम्पन्न राष्ट्र है। देश की वर्तमान प्रगति को देखकर यह आशा की जा सकती है कि भविष्य में भारत अपने उस सुदूर अतीत के गौरव को पुन: प्राप्त कर लेगा।
उन्होंने जैनियों की घटती संख्या पर चिंता जताते हुए आबादी बढ़ाने पर जोर दिया। वास्तुविद डॉ. राजेंद्र जैन इंदौर ने वास्तु विद्या के नए प्रयोगों से अवगत कराया। संगोष्ठी में डॉ. एसके जैन इंदौर, जम्बू प्रसाद जैन गाजियाबाद, सुधीर जैन उपायुक्त भोपाल, मयंक जैन दिल्ली ने भी विचार रखे। संचालन प्राचार्य अंबुज जैन ने किया। इस मौके पर शैलेंद्र कुमार जैन एडवोकेट, प्रद्युमभन कुमार जैन, अनिल कुमार जैन, कैलाश चंद्र जैन, मयंक जैन, घनश्याम दास जैन, सुरेश कुमार जैन, मुकेश जैन, हेमंत जैन, पंकज जैन, राजेश जैन, यतीश जैन, सुरजीत जैन आदि मौजूद रहे।