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सूखा सावन, छल रहे बादल, तरस रहे खेत

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ध्यान पाल सिंह - फोटो : CITY OFFICE
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किसानों का बारिश का इंतजार थमने का नाम नहीं ले रहा है। सावन के महीने में भी बादल आसमान में खूब उमड़-घुमड़ तो रहे हैं, लेकिन जमकर बरस नहीं रहे। इससे खेतों की प्यास नहीं बुझ पा रही है। वह पानी के लिए तरस रहे हैं।
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सूरज की तल्खी के चलते तापमान बढ़ता जा रहा है, जिससे भीषण गर्मी और उमस ने लोगों को परेशान कर रखा है। बारिश के चलते चहकती-महकती हरियाली एवं खुशनुमा प्राकृतिक वातावरण का सुखद अहसास कराने वाला सावन मास सूखा ही साबित हो रहा है। उमस भरी गर्मी से हर कोई पसीना-पसीना हो रहा है।
सावन में इस बार कम हुई बारिश
सावन में भी अब तक बारिश न होने से क्षेत्र के किसान चिंतित हैं। बुजुर्ग किसानों का मानना है कि सावन में ऐसा मौसम पहली बार देखा जा रहा है। एक सप्ताह के भीतर अच्छी बरसात नहीं हुई तो धान की नर्सरी सूख जाएगी। इसके बाद सूखे के संकट से जूझना पड़ेगा। जिले में बड़े पैमाने पर किसान धान की खेती से जुड़े हुए हैं। खरीफ की फसल में धान का उत्पादन किसानों के लिए फायदेमंद होता है। इस बार धान की फसल किसानों के लिए मुश्किल बन गई है। ये मुश्किल जुलाई में मानसून की बेरुखी से आई है। ऐसे में धान की फसल में लागत बढ़ने के साथ ही उत्पादन प्रभावित होने की भी आशंका बढ़ती जा रही है। अगर पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो एक ओर सिंचाई का खर्च बढ़ेगा तो वहीं दूसरी ओर उत्पादन भी प्रभावित होगा।सूखे जैसे हालात भी पैदा हो रहे हैं।
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बोले किसान...
इस बार अगर बारिश न हुई तो धान की फसल में कम से कम दस बार सिंचाई करनी पड़ेगी। एक बार में एक बीघा धान की सिंचाई में लगभग ढाई सौ रुपये का खर्च आता है। ऐसे में दस बार में प्रति बीघा फसल की सिंचाई पर ढ़ाई हजार रुपये का खर्च आएगा।
- श्यौराज सिंह, बलवंत नगरिया ।
बारिश न होने से सूखे जैसे हालात पैदा हो रहे हैं। इससे फसलें सूख रही हैं और उन्हें बचाने के लिए महंगी सिंचाई करनी पड़ रही है। पशुओं के चारे तक समस्या पैदा हो गई है।
- ध्यानपाल सिंह, पनिहावर ।
जुलाई माह में लगभग 250-300 मिमी के बीच बारिश औसत मानी जाती है। इससे कम बारिश सूखा जैसे हालातों को जन्म दे रही है। हालांकि मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में बारिश होने की संभावना जतायी है।
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- यशराज सिंह, उप कृषि निदेशक।

श्योराज सिंह - फोटो : CITY OFFICE

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