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सभी का मंगल करते हैं मंगलेश्वर महादेव

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जयगंज स्थित मंगलेश्वर महादेव मंदिर का मुख्य पिंड। - फोटो : CITY OFFICE
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जयगंज स्थित मंगलेश्वर महादेव मंदिर अपनी प्राचीनता और भव्यता के कारण प्रसिद्ध है। संकरी गलियों के बीच से होते हुए मंगलेश्वर महादेव के दरबार में भक्तों को पहुंचना पड़ता है। भले ही उन्हें यह मुश्किलें झेलनी पड़े, मगर भक्तों में आज भी यहां अपार श्रद्धा है। इसीलिए सावन मास में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ता है। मंदिर में भगवान भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं, साथ में नंदी भी हैं।
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मान्यता है कि जो भी मंगलेश्वर महादेव के दरबार में श्रद्धा और भाव से आया वह कभी खाली हाथ नहीं लौटा । जयगंज में घनी आबादी के बीच आज भी पुरानी परंपराएं जीवंत हैं। यहां की नक्काशी देख कर अंदाजा लगा सकते हैं कि यह मंदिर राज वालों के समय का है। मंदिर के प्रवक्ता अंकित वार्ष्णेंय बताते हैं कि यह मंदिर 500 साल पुराना है। यहां प्राचीन समय के पत्थर लगे हुए हैं, जिन पर 300 साल से अधिक की तिथियां अंकित हैं। बताते हैं कि 500 साल पहले राजा मंगलसेन अलीगढ़ होकर निकल रहे थे। जय गंज के पास बड़े टीले पर उन्होंने सेना को विश्राम के लिए आदेश दे दिया। सेना विश्राम कर रही थी तभी मंगलसेन को एक शिवलिंग दिखाई दिया। उस शिवलिंग में अलग तरह की अलौकिकता थी जिसे देखकर मंगल सेन भक्ति रस से भर उठे। उन्होंने तुरंत सैनिकों को टीले की साफ - सफाई के निर्देश दिए, जिससे टीला पूरी तरह से साफ हो गया। उसके बाद मंगलसेन ने ब्राह्मण को बुलवाकर वहां पूजन शुरू कर दिया। जलाभिषेक के साथ ही भगवान भोलेनाथ से सभी के मंगल की कामना की। इसके बाद से मंदिर का नाम मंगलेश्वर महादेव मंदिर पड़ गया। महाशिवरात्रि के दिन यहां भोलेनाथ का डोला निकलता है।
सावन में उमड़ता है आस्था का सैलाव
मंदिर के पुजारी आचार्य महेश चंद्र बताते हैं कि सावन के महीने में मंगलेश्वर महादेव मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने को आते हैं। जयगंज संकरी गलियों का नगर भी कहा जाता है। इसलिए मंदिर के चारों तरफ काफी संकरी गलियां हैं, मगर भक्तों की आस्था देखते ही बनती है। घंटों लाइन में खड़े होकर वह भगवान भोलेनाथ के दरबार में पहुंचते हैं और पूजन- अर्चन करते हैं।
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बोले भक्त ...
मंगलेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन को नियमित आती हूं। हरेक शुुुभ कार्य करने से पहले भी बाबा की पूजा-अर्चना की जाती है।
- रेनू शर्मा
बाबा से जो कुछ मांगा वो सब उम्मीद से कहीं ज्यादा मिला है। सावन मास के अलावा महाशिवरात्रि पर भक्तों का अपार सैलाव उमड़ पड़ता है।
- नीलम वार्ष्णेय
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