खाने की थाली लगातार महंगी होती जा रही है। जीएसटी काउंसिल की सिफारिशों के बाद पिछले एक माह में खाद्य पदार्थ की कीमतें लगातार बढ़ रहीं हैं। इनमें सर्वाधिक असर अरहर की दाल, चावल व आटे पर पड़ता दिख रहा है। जिसके कारण आम आदमी के परिवार की रसोई का बजट भी गड़बड़ा रहा है और गृहणियों में इसके प्रति लगातार गुस्सा दिखाई दे रहा है।
जीएसटी काउंसिल की सिफारिशें लागू होने के बाद पिछले माह ही आटा व चावल के दाम बढ़े थे। इस माह में एक बार फिर कीमतों में उछाल आया है। जिककी वजह से सामान्य परिवारों में नाराजगी देखने को मिल रही है। हालांकि बाजार में खाद्य तेल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। बाकी अन्य वस्तुओं की कीमत भी लगातार स्थिर हैं। पिछले एक माह में रसोई से जुड़ी अन्य वस्तुओं की बात करें तो एक मात्र मखाने की कीमत एकाएक सौ रुपये प्रति किलो गिरी हैं।
- महंगाई लगातार बढ़ रही है। अब आटा, चावल व अरहर की दाल की कीमतों में उछाल आया है। सरकार महंगाई को लेकर रिकार्ड बना रही है। कभी गैस सिलिंडर महंगा कर दिया जाता है तो कभी कुछ और। इससे रसोई का बजट लगातार बिगड़ रहा है।-कोमल, सराय हकीम
-बाजार में आए दिन महंगाई दिख रही है। कभी किसी वस्तु पर तो कभी किसी वस्तु पर कीमत बढ़ जाती है। अब ताजा आटा, चावल व अरहर की दाल ने तेजी पकड़ी है। ये ऐसी वस्तुएं हैं, जो रसोई में हर दिन इस्तेमाल होने वाली हैं। जिसके कारण रसोई का बजट बिगड़ना तय है। - नीलम वार्ष्णेय, सासनी गेट
-जीएसटी काउंसिल की कीमतों के बाद एक बार फिर कुछ वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हुई है। अब आटा, दाल अरहर व चावल में तेजी है। इसके पीछे कई अलग अलग वजह हैं। जिनमें प्रमुख वजह जीएसटी व दूसरा बाजार में माल की कमी भी माना जा रहा है।-आकाश ननवानी, किराना स्टोर संचालक
-इनकी कीमतों में उछाल-
चीनी 39 से बढ़कर 40 रुपये प्रति किलो
आटा खुला 27 से बढ़कर 29 रुपये प्रति किलो
आटा पैक्ड 30 व 34 से बढ़कर 32 व 36 रुपये प्रति किलो
दाल अरहर 100 रुपये से बढ़कर 125 रुपये प्रति किलो
चावल 80/85 से बढ़कर 90/95 रुपये प्रति किलो
छोले 110 से बढ़कर 120 रुपये प्रति किलो