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साहित्यकारों ने कलम से जला रखी थी क्रांति की ज्वाला

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प्रद्युमन - फोटो : CITY OFFICE
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जिले के साहित्यकारों ने कविताओं के जरिये क्रांतिकारियों को देश पर अपनी हस्ती गंवाने के लिए अमृत पिलाया। उनमें कविताओं से जोश भरा। ब्रज साहित्य के मूर्धन्य कवि पंडित नाथूराम शंकर शर्मा ‘शंकर’ ने गुलामी की जंजीरों में जकड़ी मातृभूमि को व्यथित होकर लिखा - ‘बर वैदिक बोधबिलाय गयौ, छल के बल की छवि छूटि परी, पुरुषारथ, साहस, मेल मिटे, मत-मथन के मिस फूट परी, अधिकार भयौ परदेसिन कौ, धन-धाम धरा पर लूट परी, कवि शंकर आरत भारत पै, भय भूरि अचानक टूट परी’।
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प्रो. चिंतामणि शुक्ल की पुस्तक ‘अलीगढ़ जनपद का राजनैतिक इतिहास’ में आजादी में अपनी कविताओं से देश की क्रांति में धार देने वाले साहित्यकारों व कवियों का वर्णन है। कवि दुलारेलाल भार्गव की ब्रजभाषा में देशप्रेम का छलकता प्याला है। कवि सत्यनारायण ने स्वाधीनता पर मरने वाले परवानों के यह लिखा था ‘कोमल कलाप कोकिल कमनीय कूकती थी, वह मातृभूमि मेरी वह पितृभूमि मेरी’। कवि पंडित गोकुलचंद शर्मा ने प्रणवीर प्रताप, गांधी गौरव, तपस्वी तिलक, पद्य प्रदीप, मानसी, अशोक वन, धरती के ध्रुव तारे, मंगलमार्ग, अभिनव रामायण, महाभारत आदि ग्रंथों का प्रणयन किया था। इनके साहित्य पर अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध जूझते हुए भारतीय राष्ट्र के संघर्षकाल की छाप है। पंडित हरिशंकर शर्मा ने भी देशभक्ति पर रचनाएं लिखी थीं। कवि जैनेंद्र कुमार ने असहयोग आंदोलन में हिस्सा लिया। जेल जीवन ने ही इनको साहित्य सेवा की ओर उन्मुख किया। डॉ. नगेंद्र ने देश से जुड़े साहित्य पर काम किया। डॉ. धनीराम प्रेम ने अपना जीवन साहित्य साधना में लगा दिया। वह भी देश की आजादी के जंग में कूद पड़े।
वंदेमातरम, जय जवान के नारे हर तरफ गूंजे : जमील
काजी पाड़ा निवासी मोहम्मद जमील ने बताया कि आजादी के 75 साल बाद देश में फिर से वो माहौल बनता दिख रहा है। 1947 की बात करें तो कई दिनों तक आजादी का जश्न मनाया गया था। वंदेमातरम, जय जवान, जय किसान, जय हिंद जैसे नारों की गूंज हर तरफ सुनाई देती थी।
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पहले अलख जगाने वाले अखबार थे : प्रद्युमभन
कृष्णापुरी निवासी प्रद्युमभन कुमार जैन ने बताया कि हर व्यक्ति के दिल और दिमाग में आजादी की जंग जीतने की खुशी थी। देश में अखबारों को वह आजादी नहीं थी, जो आज प्रेस को है, जब न अखबारों में मनोरंजन की खबर होती थी, न अन्य इधर-उधर की खबरें, अखबार लोगों में आजादी की अलख जगाने का माध्यम थे।

मोहम्मद जमील।- फोटो : CITY OFFICE

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