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अलीगढ़ : मेरी छोटी सी नाव, तेरे जादू भरे पांव मैं कैसे बिठाउं अपनी नाव में ...

सार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़ रविवार को रामलीला महोत्सव के तहत सरयू पार की लीला का मंचन हुआ।लक्ष्मण और परशुराम के संवाद को देख दर्शक भाव- विभोर हो उठे।
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अलीगढ़ : रामलीला मैदान में रामलीला गोशाला कमेटी द्वारा श्रीराम लीला महोत्सव में केवट लीला का मंच? - फोटो : CITY OFFICE
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विस्तार
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
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रविवार को रामलीला महोत्सव के तहत सरयू पार की लीला का मंचन हुआ। जिसमें नाव पर विराजमान प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण और सीता जी के दर्शन को मानो पूरा शहर उमड़ पड़ा। लीला देख श्रद्धालु अभिभूत हो गए । रंग-बिरंगी रोशनी से नहाया रामलीला का मंच अद्वितीय लग रहा था। रामलीला के 100 के इतिहास में यह दूसरा मौका था जब सरयू पार की लीला अचल सरोवर में नहीं हो सकी। अचल पर इन दिनों स्मार्ट सिटी के तहत सौंदर्यीकरण का कार्य चल रहा है। आजादी से पहले भी यहां बड़े उत्साह के साथ रामलीला महोत्सव का आयोजन किया जाता रहा है। अचल पर सरयू पार की लीला न होने से दर्शक थोड़े निराश भी हुए।
वन गमन के दौरान प्रभु श्रीराम अनुज लक्ष्मण व माता सीता के साथ सरयू नदी के तट पर पहुंचे। केवट ने प्रभु श्रीराम से कहा कि आपके पांव में तो जादू है। पत्थर को पांव लगाया तो वह नारी बन गई। अब मेरी लकड़ी की नाव को पांव से स्पर्श किया तो वह भी नारी बन जाएगी। केवट श्री राम, माता सीता के आग्रह पर बड़ी मुश्किल से राजी होता है। शर्त रख देता है कि बिना पांव पखारे नाव से सरयू नदी को पार नहीं कराएगा।
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श्रीराम केवट को उतराई देते हैं। केवट कहता है कि प्रभु मैं आपको सरयूपार लगाऊंगा, आप मुझे भवसागर पार करा देना। फिर तो जयश्रीराम के जयकारे से पूरा माहौल गूंज उठा। इस मौके पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष एवं संयोजक विमल अग्रवाल, अन्नु बीड़ी, विक्रांत गर्ग, ऋषभ गर्ग, संयम पाराशर, टीएन मित्तल, आकाश अग्रवाल, राजेश गर्ग, अर्जुन गोविल, अनिल सेंगर, सीए पीयूष अग्रवाल आदि मौजूद रहे ।
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राम - सीता मिलन देख मंत्रमुग्ध हुए दर्शक
महानगर के नगला तिकोना स्थित आदर्श रामलीला कमेटी के तत्वावधान में चल रही रामलीला में जनकपुरी में प्रभु श्रीराम का पुष्प वाटिका में सीता जी से मिलन की लीला देख दर्शक मंत्र मुग्ध हो गए। रामलीला में ताड़का वध, अहिल्या उद्धार की लीला का मंचन हुआ। गुरू विश्वामित्र राजा दशरथ के पास प्रभु श्री राम और लक्ष्मण को मांगने पहुंचते हैं। विश्वामित्र दोनों भाइयों को लेकर जंगल की ओर बढ़ जाते हैं। यहां पर राम और लक्ष्मण ताड़का का वध करते हैं। मारीच को बाण मारकर कई योजन दूर भेज देते हैं। तभी जनकपुरी से सीता स्वयंवर के लिए निमंत्रण आता है। विश्वामित्र दोनों भाईयों को लेकर जनकपुरी के लिए चल पड़ते हैं। मार्ग में पत्थर बनी अहिल्या का उद्धार प्रभु श्रीराम करते हैं। गुरु विश्वामित्र श्रीराम और लक्ष्मण के साथ जनकपुरी पहुंचते हैं। प्रभु श्रीराम की मोहनी सूरत देखकर पूरी जनकपुरी निहाल हो उठी। राजा जनक स्वयंवर की तैयारी में जुटे हुए हैं। लंकापति रावण भी वहां पहुंचा तभी आकाशवाणी हुई जिसे सुनकर रावण वहां से चला गया। लक्ष्मण-जनक संवाद के बाद श्रीराम ने धनुष को तोड़ा। तभी भगवान परशुराम आ गए। लक्ष्मण और परशुराम के संवाद को देख दर्शक भाव- विभोर हो उठे। माता सीता ने भगवान राम के गले में वरमाला पहनाई तो वहां जयश्री राम के नारे गूंजने लगे। आयोजन में अध्यक्ष हरी सिंह लोधी, संदीप पाठक, गवेंद्र पाल सिह, विष्णुशंकर सैनी, इंद्रपाल सिंह वर्मा, राजवीर सिंह, सत्यप्रकाश शर्मा, अजय कुमार सक्सेना, शंकर लाल गोस्वामी आदि मौजूद रहे।
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